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मंगलवार, 24 जुलाई, 2007 को 15:35 GMT तक के समाचार

'भारत बन सकता है विकसित राष्ट्र'

राष्ट्रपति की हैसियत से देश के नाम अपने अंतिम संदेश में एपीजे अब्दुल कलाम ने भारत के सर्वोच्च पद पर बिताए अपने पाँच वर्षों को खूबसूरत और रोमांचक बताया है और कहा है कि अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने हर पल का भरपूर आनंद उठाया.

उन्होंने देशवासियों और देश से बाहर रह रहे भारतीयों को संबोधित करते हुए कहा कि आज का दिन वाकई धन्यवाद देने का दिन है.

कलाम ने कहा कि वह भारत को एक ऐसे देश के रूप में देखना चाहते हैं जहाँ की शासन-प्रणाली जवाबदेह और पारदर्शी हो और जहाँ भ्रष्टाचार न हो.

राष्ट्र के नाम अपने विदाई संदेश में उन्होंने कहा कि अब जीवन में उनका मक़सद समाज में अलग-अलग सांस्कृतिक पृष्ठभूमि वाले करोड़ों लोगों के दिल और दिमाग को जोड़ना और उनमें आत्मविश्वास भरना है जिससे लोगों के मन में यह भावना पैदा हो कि “हाँ, हम ऐसा कर सकते हैं.”

राष्ट्रपति ने एक दस सूत्री योजना सामने रखी जिस पर अमल करके देश एक विकसित राष्ट्र बन सकता है.

कविता

वैज्ञानिक राष्ट्रपति का कवि मन इस बार भी डोला और एक जानी-मानी कविता की कुछ पंक्तियाँ दोहराए बिना वो रह न सके. “जब एक सितारे को देखकर आप उम्मीद करते हैं तो यह बात मायने नहीं रखती कि आप कौन हैं कौन नहीं? वो हर मन्नत जो दिल में होती है, ज़रूर पूरी होती है.”

राष्ट्रपति कलाम ने जोर देकर कहा कि यह कविता हम सभी के लिए एक सत्य है और खासकर देश के उन 54 करोड़ युवाओं के लिए जो ऊँचाई तक पहुँचने का लक्ष्य तय करते हैं और यदि वे लक्ष्य तक नहीं भी पहुँचे तो उसके नज़दीक वह ज़रूर पहुँचेंगे.

भारतीय सेना के सर्वोच्च सेनापति के तौर पर अपने धन्यवाद भाषण में राष्ट्र की सुरक्षा में सैनिकों के योगदान को भी सराहा और दोहराया कि 25 वर्ष की आयु वाले 54 करोड़ युवाओं की ताकत और उनका प्रेरित मस्तिष्क उनकी नज़र में दुनिया में सबसे ताकतवर संसाधन है.

उन्होंने अपने सियाचिन के दौरे को याद किया और कहा कि भारतीय सैनिक बहुत ही कठिन परिस्थितियों में बहुत बहादुरी से राष्ट्र की सेवा कर रहे हैं.

अपने विदाई भाषण के अंत में लोगों को धन्यवाद देते हुए राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने कहा कि देश के हर वर्ग से जो आत्मविश्वास उन्हें मिला है, वे विश्वास पूर्वक कह सकते हैं कि भारत 2020 से पहले ही एक विकसित देश बन सकता है.

उन्होंने अपने भाषण कई आम लोगों के उदाहरण दिए. उन्होंने हरियाणा की एक छोटी लड़की की मिसाल दी जिसने उनसे पूछा था कि देश 2020 से पहले क्यों विकसित नहीं हो सकता.

इसी तरह उन्होंने कोयम्बटूर के एक ग़रीब विकलांग की बात कही जो त्यागराज के भजन गाता है, उन्होंने कहा कि ये आम लोग कठिनाइयों से जूझने की भारतीय जिजीविषा के प्रतीक हैं.