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मंगलवार, 24 जुलाई, 2007 को 12:43 GMT तक के समाचार

नारायण बारेठ
बीबीसी संवाददाता, राजस्थान

श्रमजीवी गर्दभ चिकित्सालय खुला

राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र में कामकाजी गधों के लिए एक विशेष अस्पताल खोला गया है.

एक ग़ैर सरकारी संगठन की पहल से खुले अस्पताल में बीमार गधों को चिकित्सा केंद्र तक पहुँचाने के लिए एक वातानुकूलित एबुलेंस की व्यवस्था भी की गई है.

राज्य के समाज कल्याण मंत्री मदन दिलावर झुंझुनू ज़िले के डूंडलोद में रविवार को जब ‘द डंकी सेंक्चुरी’ नामक संगठन की इस परियोजना का उदघाटन कर रहे थे, तभी पृष्ठभूमि में गधे ढेंचू-ढेंचू की आवाज़ से अपनी उपस्थिति का अहसास करा रहे थे.

मंत्री महोदय थोड़ा सकुचाए, लेकिन फिर अपना भाषण शुरू किया और कहा, “हमारी संस्कृति में हर जीव में भगवान के दर्शन की बात कही गई है.”

वे गधों के गुण गिनाना भी नहीं भूले और कहा, “यह बहुत मेहनती और समझदार जानवर है. सबसे सस्ता और बहुत उपयोगी. ये अलग बात है कि गधे का बहुत मजाक उड़ाया जाता है.”

गधों के अस्पताल के बारे में परियोजना के प्रभारी डॉ राजामुरुगन ने बताया, “यह चिकित्सा केंद्र चौबीसों घंटे काम करेगा और बीमार गधों की तीमारदारी की जाएगी.”

ब्रिटेन की एक संस्था इस परियोजना में सहायता कर रही है.

ज़रूरत

सवाल है कि आखिर शेखावाटी में इसकी ज़रूरत क्यों महसूस हुई?

डॉ राजामुरुगन कहते हैं, “राजस्थान में गधों की अच्छी-खासी तादाद है. शेखावाटी में बोझा ढोने के लिए इनका जमकर इस्तेमाल होता है.”

उन्होंने बताया कि यहाँ गधों को गाड़ी में भी जोता जाता है. इस गाड़ी से गधों की गर्दन पर जख़्म हो जाता है, इसलिए संस्था इस गाड़ी को ज़्यादा आरामदेह बनाने की कोशिश कर रही है.

संस्था गधों की उचित देखभाल के लिए पशुपालकों को भी शिक्षित करेगी.

अपनी गधा गाड़ी के साथ समारोह में आए सिकंदर कहते हैं, “अब इस बेजुबान जानवर को भी इलाज की सुविधा मिल सकेगी.”