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मंगलवार, 24 जुलाई, 2007 को 18:10 GMT तक के समाचार

नारायण बारेठ
बीबीसी संवाददाता, जयपुर

पाक श्रद्धालुओं के स्वागत से इनकार

महान सूफ़ी संत ख़्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के सालाना उर्स में शिरकत के लिए आए पाकिस्तानी श्रद्धालुओं का खादिमों की संस्था 'अंजुमन' सहित कई संगठनों ने भावभीना स्वागत किया.

लेकिन भाजपा शासित अजमेर नगर परिषद ने सरहद पार से आए इन यात्रियों का पारंपरिक अभिनंदन करने से इनकार कर दिया.

विपक्षी कांग्रेस पार्टी ने इस रवैए के लिए भाजपा की आलोचना की है.

अजमेर नगर परिषद ने पाकिस्तानी ज़ायरीन के अभिनंदन की वर्षों पुरानी परंपरा को पिछले साल ही यह कहकर तोड़ दिया था कि आज के माहौल में इसकी कोई ज़रूरत नहीं है.

पाकिस्तान से इस बार भी एक विशेष रेलगाड़ी 462 ज़ायरीनों को लेकर अजमेर आई थी.

पड़ौसी मुल्क से आए इन श्रद्धालुओं ने कोई सप्ताह भर की समयावधि में जियारत की और स्थानीय लोगों से दिल खोल कर मिले.

दरगाह के महफिलखाने में सोमवार को उस वक्त माहौल भावुक हो गया जब 'अंजुमन' की ओर से पाकिस्तानी श्रद्धालुओं को भावभीनी विदाई दी गई.

साथ ही दोनों देशों में अमन चैन, रिश्तों में प्रगाढ़ता और मानव कल्याण के लिए दुआ की गई.

खादिम सैयद सरवर चिश्ती कहते हैं,'' वहाँ अत्यंत भावुक माहौल था. पाकिस्तानी श्रद्धालु यहाँ मिले प्यार और सम्मान से अभिभूत थे.''

अभिनंदन की परंपरा

विदाई की बेला में अजमेर नगर परिषद पाकिस्तानी ज़ायरीन के लिए अभिनंदन समारोह आयोजित करती रही है.

लेकिन अजमेर नगर परिषद के अध्यक्ष धर्मेंद्र गहलौत कहते हैं, '' प्रशासन, दरगाह कमेटी और अंजुमन इन श्रद्धालुओं का अभिनंदन कर चुकी है. ऐसे में नगर परिषद का स्वागत करना ज़रूरी नहीं हैं. यह सिलसिला तो पिछली बार ही टूट गया था.''

गहलौत कहते हैं, '' पाकिस्तान की भारत के प्रति नीयत ठीक नहीं है. फिर जब श्रद्धालुओं पर पुलिस निगरानी रखती है तो वे मेहमान की श्रेणी में नहीं आ सकते. हम केवल अतिथियों का अभिनंदन कर सकते हैं.''

लेकिन अजमेर से कांग्रेस विधायक श्रीगोपाल बाहेती कहते हैं, '' यह दुर्भाग्यपूर्ण है. भाजपा की मानसिकता छोटी है. इन ज़ायरीन से स्थानीय लोग प्रेम से मिले, उनका स्वागत किया और ज़ायरीन बहुत खुश हुए. नगर परिषद का यह क़दम ठीक नहीं है. हमें दोस्ती गहरी करनेवाले क़दम उठाने चाहिए.''

सन् 1866 में स्थापित अजमेर नगर परिषद राजस्थान की सबसे पुरानी नगरीय संस्था है.

शुरुआती दौर में इसके ब्रितानी अध्यक्ष रहे और सांप्रदायिक सौहार्द की इसकी लंबी परंपरा रही है.

इससे पहले भाजपा शासित नगर परिषद ने ज़ायरीन का पारंपरिक अभिनंदन भी किया है. लेकिन अब यह परंपरा टूटी है.