रविवार, 22 जुलाई, 2007 को 11:47 GMT तक के समाचार
अफ़ग़ानिस्तान में बंधक बनाए गए दक्षिण कोरियाई नागरिकों को रिहा करवाने के लिए प्रयास तेज़ हो गए हैं.
दक्षिण कोरिया से आया दल काबुल में है और एक मंत्री ने उम्मीद जताई है कि नागरिक रिहा कर दिए जाएँगे.
तालेबान लड़ाकों ने कोरिया के 23 नागरिकों को ग़ज़ानी प्रांत से उस समय अगवा कर लिया था जब वो गुरुवार को कंधार से काबुल जा रहे थे.
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि बल के बजाए कूटनीति के ज़रिए बंधकों को रिहा करवाने की कोशिश हो रही है.
उधर रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षाकर्मियों ने उस इलाक़े को घेर लिया है जहाँ तालेबान लड़ाकों ने 23 दक्षिण कोरियाई लोगों को बंधक बनाया हुआ है.
अधिकारी ने बताया कि ग़ज़नी प्रांत में बंधकों को छुड़ाने के लिए अभी सैन्य कार्रवाई नहीं की गई है.
इस बीच पुलिस का कहना है कि बुधवार को अगवा किए गए एक जर्मन नागरिक का शव बरामद किया गया है.
जर्मन बंधकों को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई थी.तालेबान प्रवक्ता ने कहा था कि चूँकि जर्मनी ने अफ़ग़ानिस्तान से अपनी सेना हटाने से मना कर दिया है, इसलिए उसके दोनों नागरिकों को शनिवार को मार दिया गया है.
लेकिन जर्मनी का कहना है कि वो मानता है कि एक नागरिक अब भी ज़िंदा है और दूसरे की मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई.
बंधक
वर्दक प्रांत के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मोहम्मद एवाज़ ने बीबीसी को बताया, "हमें एक जर्मन नागरिक का शव मिला है. अभी और जानकारी नहीं है."
तालेबान का कहना है कि वो चाहता है कि इन नागरिकों को रिहा करने के बदले में जेल में बंद उसके लड़ाकों को छोड़ा जाए और दक्षिण कोरियाई सेना अफ़ग़ानिस्तान से वापस जाए.
माना जा रहा है कि कबीले के कुछ वरिष्ठ लोग कोरियाई लोगों को छुड़ाने की कोशिश कर रहे हैं.
अफ़ग़ान रक्षा मंत्रालय के जनरल मोहम्मद ज़हिर ने बीबीसी को बताया, हमने इलाक़े को घेर लिया है. हम स्थिति का जायज़ा ले रहे हैं.
वहीं नैटो के प्रवक्ता ने कहा कि उसे किसी भी तरह के अभियान की जानकारी नहीं है. तालेबान ने शुरू में कहा था कि कुल 18 बंधक हैं लेकिन बाद में संख्या बढ़ाकर 23 कर दी.
माना जा रहा है कि इनमें से कम से कम 15 महिलाएँ हैं.