गुरुवार, 19 जुलाई, 2007 को 19:29 GMT तक के समाचार
इस्लामाबाद के लाल मस्जिद में हुई सैनिक कार्रवाई के दौरान बच निकली एक महिला का कहना है वह आत्मघाती हमलावर बनने के लिए तैयार थी.
18 वर्षीया इस महिला ने बीबीसी उर्दू सेवा से बातचीत में स्पष्ट किया कि उन्हें चरमपंथियों ने बंधक नहीं बनाया था बल्कि वह स्वेच्छा से मस्जिद के भीतर रहीं.
अपना नाम सार्वजनिक न करने की शर्त पर इस महिला ने बताया कि वो मस्जिद की रक्षा के लिए अपनी जान क़ुर्बान करने के लिए अपने को तैयार कर चुकी थीं.
लाल मस्जिद में हुई सैन्य कार्रवाई के दौरान चरमपंथियों और सुरक्षाकर्मियों को मिलाकर 100 से ज़्यादा लोग मारे गए.
जब लाल मस्जिद से सटे मदरसे के शिक्षकों और छात्रों ने इस्लामाबाद में शरिया क़ानून सख़्ती से लागू करने की माँग के पक्ष में आक्रामक रुख़ अख़्तियार कर लिया तब सरकार ने ठोस कार्रवाई की रणनीति बनाई.
आत्मघाती हमला
मस्जिद के भीतर रही महिला कहती है कि वो बाहर तैनात सरकारी सुरक्षाबलों पर आत्मघाती हमला करने के लिए तैयार थीं.
उनकी योजना पर पानी फिर गया क्योंकि मस्जिद में उनके इस्तेमाल के लिए विस्फोटक ही नहीं था. इस महिला का कहना है कि मस्जिद के भीतर कई और महिलाएँ मरने के लिए तैयार थीं.
वो कहती हैं, "हम आत्मघाती हमले करना चाहते थे. हमारे पास आमने-सामने की लड़ाई के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं थे. हाँ हम किसी भी सीमा तक जाने के लिए तैयार थे."
वह बताती हैं, "बहुत कम लड़कियाँ ही बाहर निकलीं क्योंकि वो डरी हुई थीं. इनमें या तो कम उम्र की लड़कियाँ थीं या वो थीं जिन्हें उनके माता-पिता ने जबरन बाहर निकलने पर मज़बूर कर दिया."
वो मस्जिद से बाहर जीवित निकली 30 महिलाओं में से एक हैं. वो कहती हैं कि उनके लिए सबसे बड़ा पछतावा यही है कि वो शहादत नहीं दे सकीं और जब उन्होंने अपने पिता को दोबारा देखा तो उन्हें ऐसा लगा जैसे 'दुख ने उन्हें पराजित' कर दिया है.
अब उनका लक्ष्य है एक नया मदरसा खोलना जिसमें जेहाद की शिक्षा दी जाएगी.