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मुंबई: तीन और लोगों को मौत की सज़ा

विशेष टाडा अदालत ने 1993 में मुंबई में हुए बम धमाकों में तीन और लोगों को मौत की सज़ा सुनाई है.

अदालत ने गुरुवार को असगर मुक़दम, शहनवाज़ कुरैशी और शोएब घनसार को मौत की सज़ा सुनाई है.

असगर मुकादम और शहनवाज़ कुरैशी को प्लाजा सिनेमा पर विस्फोटक रखने का दोषी पाया गया था.

इससे हुए विस्फोट से 10 लोगों की जान गई थी और 36 लोग घायल हो गए थे.

शोएब घनसार को झावेरी बाज़ार में बम रखने का दोषा पाया गया.

उन्होंने स्कूटर में आरडीएक्स रखकर विस्फोट कराया था जिसमें 17 लोगों की जान गई थी और 57 लोग घायल हो गए थे.

सरकारी वकील उज्जवल निकम ने बताया कि टाडा अदालत में न्यायाधीश पीके कोडे का कहना था, '' यदि आप ऐसा अपराध करते हैं तो इसके लिए और कोई सज़ा नहीं हो सकती.''

इसके पहले बुधवार को टाडा अदालत ने तीन लोगों परवेज़ शेख, मुश्ताक तरानी और अब्दुल गनी तुर्क को मौत की सज़ा सुनाई थी.

ग़ौरतलब है कि 1993 बम धमाके के मामले में अब छह लोगों को मौत की सज़ा सुनाई जा चुकी है.

सरकारी वकील ने बताया कि इन फ़ैसलों की पुष्टि के लिए सुप्रीम कोर्ट की अनुमति ली जाएगी और उसके बाद सज़ा पर अमल किया जा सकता है.

1993 में मुंबई में हुए बम धमाकों के मामले में आतंकवाद निरोधक अदालत ने कुल 100 लोगों को दोषी ठहराया था और 23 लोगों को बरी कर दिया था.

अभियुक्तों में बॉलीवुड स्टार संजय दत्त भी शामिल हैं और उन्हें अभी सज़ा सुनाई जानी बाक़ी है.

बम धमाके

ग़ौरतलब है कि 1993 में मुंबई में 12 बम धमाके हुए थे, जिनमें 257 लोग मारे गए थे और 700 से ज़्यादा लोग घायल भी हुए थे.

माना जाता है कि 1992 में बाबरी मस्जिद गिराए जाने के बाद मुस्लिम अंडरवर्ल्ड के इशारे पर ये धमाके हुए थे.

माफ़िया सरगना दाउद इब्राहिम पर बम धमाकों की साज़िश रचने का आरोप है लेकिन वे अब भी फ़रार हैं.

भारत सरकार कहती रही है कि दाउद इब्राहिम और एक अन्य संदिग्ध टाइगर मेमन पाकिस्तान में छिपे हुए हैं लेकिन पाकिस्तान इससे इनकार करता है.

मुंबई धमाकों के ज़्यादातर अभियुक्त पिछले 13 वर्षों से जेल में हैं.

यह मुक़दमा इतना लंबा चला कि 12 अभियुक्तों की मौत हो गई और कई अभियुक्तों ने उतनी सज़ा काट ली है, जितनी उन्हें आजीवन क़ैद मिलने के बाद भुगतनी पड़ती.