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बुधवार, 18 जुलाई, 2007 को 09:40 GMT तक के समाचार

मुंबई धमाके: तीन लोगों को मौत की सज़ा

विशेष टाडा अदालत ने 1993 में मुंबई के सिलसिलेवार बम धमाके के आरोप में दोषी पाए गए परवेज़ शेख, मुश्ताक तरानी और अब्दुल गनी तुर्क को मौत की सज़ा सुनाई है.

ग़ौरतलब है कि 1993 बम धमाके के मामले में पहली बार मौत की सज़ा सुनाई गई है.

सरकारी वकील उज्जवल निकम ने बताया कि अदालत ने परवेज़ शेख को काथा बाज़ार और होटल सीरॉक में आरडीएक्स से लदा स्कूटर खड़ा करके विस्फोट करने के मामले में दोषी पाया इसलिए उन्हें मौत की सज़ा सुनाई.

अदालत ने मुश्ताक तरानी को सेंटूर होटल में आरडीएक्स रखने का दोषी पाया और उन्हें भी मौत की सज़ा सुनाई.

अब्दुल गनी तुर्क को मुंबई के सेंचुरी बाजार में आरडीएक्स से लदी जीप खड़ी करने के आरोप में मौत की सज़ा सुनाई गई है.

वो मुंबई बम धमाकों के मुख्य अभियुक्त टाइगर मेमन के ड्राइवर हैं.

सरकारी वकील ने बताया कि इन फ़ैसलों की पुष्टि के लिए सुप्रीम कोर्ट की अनुमति ली जाएगी और उसके बाद सज़ा पर अमल किया जा सकता है.

ग़ौरतलब है कि टाडा अदालत अब तक 14 लोगों को उम्र क़ैद की सज़ा सुना चुकी है.

1993 में मुंबई में हुए बम धमाकों के मामले में आतंकवाद निरोधक अदालत ने कुल 100 लोगों को दोषी ठहराया था और 23 लोगों को बरी कर दिया था.

अभियुक्तों में बॉलीवुड स्टार संजय दत्त भी शामिल हैं और उन्हें अभी सज़ा सुनाई जानी बाक़ी है.

बम धमाके

ग़ौरतलब है कि 1993 में मुंबई में 12 बम धमाके हुए थे, जिनमें 257 लोग मारे गए थे और 700 से ज़्यादा लोग घायल भी हुए थे.

माना जाता है कि 1992 में बाबरी मस्जिद गिराए जाने के बाद मुस्लिम अंडरवर्ल्ड के इशारे पर ये धमाके हुए थे.

माफ़िया सरगना दाउद इब्राहिम पर बम धमाकों की साज़िश रचने का आरोप है लेकिन वे अब भी फ़रार हैं.

भारत सरकार कहती रही है कि दाउद इब्राहिम और एक अन्य संदिग्ध टाइगर मेमन पाकिस्तान में छिपे हुए हैं लेकिन पाकिस्तान इससे इनकार करता है.

मुंबई धमाकों के ज़्यादातर अभियुक्त पिछले 13 वर्षों से जेल में हैं.

यह मुक़दमा इतना लंबा चला कि 12 अभियुक्तों की मौत हो गई और कई अभियुक्तों ने उतनी सज़ा काट ली है, जितनी उन्हें आजीवन क़ैद मिलने के बाद भुगतनी पड़ती.