मंगलवार, 17 जुलाई, 2007 को 08:58 GMT तक के समाचार
भारत ने विफल बम धमाकों के मामले में डॉक्टर मोहम्मद हनीफ़ की हिरासत बढ़ाए जाने पर ऑस्ट्रेलिया सरकार से अपनी चिंता जताई है.
भारत के विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को भारत स्थित ऑस्ट्रेलिया के उच्चायुक्त जॉन मैकॉर्थी को तलब किया और उन्हें भारत की चिंताओं से अवगत कराया.
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि ऑस्ट्रेलियाई उच्चायुक्त से कहा गया कि भारत उम्मीद करता है कि डॉक्टर हनीफ़ के साथ ऑस्ट्रेलियाई क़ानून के अनुसार न्यायोचित व्यवहार किया जाएगा.
ग़ौरतलब है कि ऑस्ट्रेलिया ने भारतीय डॉक्टर मोहम्मद हनीफ़ का वीज़ा रद्द कर उन्हें हिरासत रखे जाने का फ़ैसला किया है.
ब्रिटेन में विफल बम धमाकों के मामले में मोहम्मद हनीफ़ को दो जुलाई को गिरफ़्तार किया गया था.
सोमवार को ऑस्ट्रेलिया की एक अदालत ने मोहम्मद हनीफ़ को ज़मानत दे दी थी और उन्हें रिहा किया जाना था.
लेकिन आव्रजन (इमिग्रेशन) मंत्रालय ने उनका वीज़ा रद्द कर उन्हें हिरासत में रखने का आदेश दे दिया.
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नवतेज सरना ने सोमवार को जानकारी दी थी कि ऑस्ट्रेलिया में भारतीय उच्चायुक्त ने हनीफ़ से संपर्क स्थापित किया है.
ज़मानत
ऑस्ट्रेलियाई अधिकारियों ने आरोप पत्र में कहा था कि डॉक्टर हनीफ़ ने अपने चचेरे भाइयों सबील और कफ़ील अहमद को मोबाइल फ़ोन के सिम कार्ड उपलब्ध करवाए और एक ‘आतंकवादी संगठन’ का सहयोग किया.
लेकिन मजिस्ट्रेट ने ‘लापरवाही’ के कारण चरमपंथी संगठन का सहयोग देने का मामला मानते हुए उन्हें ज़मानत दे दी.
न्यायाधीश का कहना था कि अभियोजन पक्ष डॉक्टर हनीफ़ का किसी चरमपंथी संगठन से सीधा संबंध साबित करने में असफल रहा है.
अभियोजन पक्ष ने हनीफ़ की ज़मानत का विरोध किया और उन्हें हिरासत में रखने की वकालत की.
उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के आतंकवाद विरोधी क़ानून का हवाला दिया जिसमें विशेष परिस्थितियों में ही ज़मानत देने की व्यवस्था है.
लेकिन हनीफ़ के वकील का कहना था कि उनके ख़िलाफ़ मामला ‘बेहद कमज़ोर’ है. हनीफ़ को 10 हज़ार ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की राशि जमा करने पर ज़मानत दी गई थी.