सोमवार, 16 जुलाई, 2007 को 19:11 GMT तक के समाचार
एनडीए ने चुनाव आयोग से राष्ट्रपति चुनाव में भाग नहीं लेने के तीसरे मोर्चे के फ़ैसले को असंवैधानिक ठहराने की माँग की है.
लोकसभा में विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी के नेतृत्व में सोमवार को एनडीए के प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयुक्त नवीन चावला से मुलाक़ात की और उन्हें एक ज्ञापन सौंपा.
मुलाक़ात के बाद आडवाणी ने पत्रकारों से कहा कि राष्ट्रपति चुनाव से सांसदों और विधायकों को अलग रखने की परंपरा नहीं है.
आडवाणी ने कहा कि सांसदों और विधायकों को इस फ़ैसले को नज़रअंदाज करना चाहिए.
विपक्ष के नेता से यह सुनिश्चित करने को भी कहा कि इस फ़ैसले का पालन नहीं करने वाले सांसदों और विधायकों के खिलाफ संबंधित दल कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं कर पाएँ.
उनका कहना था कि तीसरे मोर्चे में शामिल कई दलों के सांसद और विधायक मतदान करना चाहते हैं, लेकिन उनके दलों ने उन पर मतदान में भाग नहीं लेने का फ़रमान जारी किया है.
अपील
उन्होंने आयोग से मांग की कि वह राष्ट्रपति चुनाव के निर्वाचक मंडल से इस बाध्यकारी रोक को नज़रअंदाज करने का निर्देश दे.
आडवाणी का कहना था, "अगर ऐसा हुआ तो निर्वाचक मंडल का एक बड़ा हिस्सा अपने अधिकारों का इस्तेमाल नहीं कर पाएगा जो संसदीय लोकतंत्र और जनप्रतिनिधियों के ज़रिए जनता की भागीदारी के सिद्धांत के ख़िलाफ़ होगा."
आडवाणी ने स्वीकार किया कि इस बारे में दलबदल क़ानून स्पष्ट नहीं है और इसके कारण पार्टी के फ़ैसले के विरूद्ध चुनाव में शामिल हने पर सांसदों और विधायकों के ख़िलाफ़ अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकती है.
एनडीए नेता ने बताया कि चुनाव आयुक्त नवीन चावला ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया है कि मंगलवार को आयोग की पूर्ण बैठक में ज्ञापन पर विचार कर कोई निर्णय किया जाएगा.
आडवाणी ने यह दलील भी दी कि राष्ट्रपति चुनाव अप्रत्यक्ष होने के बावजूद सांसद और विधायक जनता के प्रतिनिधि के रूप में मतदान करते हैं. ऐसे में जन प्रतिनिधियों को चुनाव में भाग लेने से रोकना जनता के अधिकारों का उल्लंघन होगा.