सोमवार, 16 जुलाई, 2007 को 17:20 GMT तक के समाचार
भोपाल की एक अदालत ने फ़र्ज़ी पासपोर्ट मामले की अभियुक्त और अबू सलेम की सहयोगी मोनिका बेदी को पुख़्ता सबूत के अभाव में बरी करने का आदेश दिया है.
हालाँकि इसी से जुड़ा एक और मामला मोनिका बेदी के ख़िलाफ़ हैदराबाद की अदालत में चल रहा है जहाँ से ज़मानत मिलने का उन्हें इंतज़ार है.
भोपाल के मुख्य दंडाधिकारी अजय श्रीवास्तव ने मोनिका बेदी को रिहा करने का आदेश देते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष उनके ख़िलाफ़ कोई पुख़्ता सबूत पेश कर पाने में विफ़ल रहा.
मोनिका बेदी की वकील पीसी वेदी ने कहा कि इस फ़ैसले के बाद हैदराबाद की अदालत में वह अपने मुवक्किल की रिहाई के लिए अपील करेंगी.
हैदराबाद की स्थानीय अदालत ने फ़र्ज़ी पासपोर्ट के मामले में मोनिका बेदी को पाँच साल की क़ैद की सज़ा सुनाई थी जिसे हाईकोर्ट ने घटा कर तीन साल कर दिया था.
हालाँकि सुप्रीम कोर्ट ने राहत देते हुए इस मामले में उन्हें ज़मानत पर रिहा करने को मंज़ूरी दे दी थी.
मोनिका बेदी को अबू सलेम के साथ सितंबर 2002 में पुर्तगाल में गिरफ़्तार किया गया था. बाद में केंद्र सरकार के अनुरोध पर दोनों को भारत प्रत्यर्पित किया गया.
अबू सलेम 1993 में मुंबई में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों के मामले में भी अभियुक्त है.