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रविवार, 15 जुलाई, 2007 को 18:54 GMT तक के समाचार

समीरात्मज मिश्र
बीबीसी संवाददाता, दिल्ली

डॉक्टरों को प्रशिक्षण देने पर विचार

राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन यानी नैको ने देश के सभी डॉक्टरों के लिए एचआईवी संक्रमित मरीज़ों की देखभाल का प्रशिक्षण अनिवार्य बनाने का सुझाव दिया है.

इस संबंध में नैको ने दो अगस्त को एक बैठक बुलाई है जिसमें तय किया जाएगा कि यह प्रशिक्षण किस तरह दिया जाए.

देश के कई हिस्सों से ऐसी ख़बरें अक्सर आती रहती हैं कि डॉक्टर एचआईवी संक्रमित मरीज़ों का इलाज करने से कतराते हैं.

उन्हें आशंका बनी रहती है कि कहीं वे भी संक्रमित न हो जाएँ, इस वजह से मरीज़ों को शारीरिक कष्ट और मानसिक यातना झेलनी पड़ती है.

इसी को ध्यान में रखकर यह प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया जाएगा, दो अगस्त को होने वाली बैठक में चिकित्सा विभाग के बड़े अधिकारियों और निजी अस्पतालों के वरिष्ठ डॉक्टरों को भी बुलाया गया है.

नैको की अध्यक्ष सुजाता राव ने बताया कि सरकारी और निजी अस्पतालों के डॉक्टरों के साथ ही नर्सों को भी प्रशिक्षित किया जाएगा ताकि मरीज़ों को तकलीफ़ से बचाया जा सके.

सुजाता राव ने कहा, "डॉक्टरों और नर्सों को यह डर या आशंका नहीं होना चाहिए कि उन्हें भी संक्रमण लग जाएगा, हमारी इच्छा है कि किसी भी मरीज़ के साथ ऐसा व्यवहार न हो जिससे उसे तकलीफ़ हो."

डॉक्टरों को पहले ही स्वास्थ्य विभाग निर्देश जारी कर चुका है कि वे एचआईवी और एड्स के मरीज़ों का इलाज करने से इनकार न करें, या उनके साथ किसी तरह का भेदभाव न करें.

सुजाता राव का कहना है कि आम लोगों को एचआईवी के बारे में जागरूक बनाने का ज़िम्मा जिन डॉक्टरों पर है वे ही गलतफ़हमियों का शिकार होकर अपने दायित्वों से मुँह मोड़ रहे हैं जो गंभीर चिंता की बात है.

अब देखना है कि यह नई योजना अस्पतालों में एचआईवी के मरीज़ों के प्रति होने वाले व्यवहार को कितना बदल पाती है.