शुक्रवार, 13 जुलाई, 2007 को 15:31 GMT तक के समाचार
उमर फ़ारूक़
बीबीसी संवाददाता, हैदराबाद
आंध्र प्रदेश की राजधानी हैदराबाद के सेंट एन महिला कॉलेज में एक लेक्चरर की टिप्पणी पर बवाल मचा हुआ है.
हैदराबाद शहर के मेहदीपट्टनम इलाक़े में स्थित इस कॉलेज की छात्राओं ने आरोप लगाया है कि लेक्चरर प्रशांति ने इस्लाम और क़ुरान के ख़िलाफ़ आपत्तिजनक टिप्पणी की है.
इससे नाराज़ छात्राओं ने लेक्चरर को हटाने की मांग की है. शुक्रवार को कॉलेज में काफ़ी तनाव रहा. सैकड़ों की संख्या में छात्राओं ने लेक्चरर के ख़िलाफ़ नारे लगाए.
तीन घंटे तक चली नारेबाज़ी चलती रही. छात्राओं की मांग है कि लेक्चरर माफ़ी मांगें और उन्हें कॉलेज से बर्ख़ास्त किया जाए.
बीए (आख़िरी वर्ष) की कुछ छात्राओं का आरोप है कि लेक्चरर प्रशांति ने एक ख़ास धर्म को निशाना बनाया और कहा कि क़ुरान 'दैवी रचना नहीं बल्कि शैतान' की लिखा हुआ है.
इस पर नाराज़ होकर छात्राएँ क्लास से निकल गईं. ख़बर फैलते ही इसके विरोध में अन्य कक्षाओं से भी छात्राएँ निकल आईं और विरोध प्रदर्शन करने लगीं.
इसके बाद इलाक़े के विधायक और मजलिस-ए-इत्तेहादुल के नेता मुक़्तदा ख़ान कॉलेज पहुँचे और छात्राओं की शिकायत सुनी. तनाव को भाँपते हुए कॉलेज परिसर और आसपास के इलाक़ों में पुलिसकर्मियों को तैनात कर दिया गया.
'संवेदनशील मामला'
बढ़ते विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए लेक्चरर प्रशांति तो कहीं छिप गईं, जबकि बाक़ी के कॉलेज कर्मचारी प्रिंसिपल के कमरे में बंद हो गए. पुलिस के पहुँचने पर ही वे बाहर आए.
कॉलेज प्रशासन से बातचीत में विधायक मुक़्तदा ख़ान ने कहा कि धर्म अतिसंवेदनशील मामला है और लेक्चरर प्रशांति को अपनी टिप्पणी के लिए तुरंत माफ़ी मांगनी चाहिए.
बाद में विवादों में घिरीं लेक्चरर माफ़ी मांगने को तैयार हो गईं, लेकिन छात्राएँ इसके लिए तैयार नहीं हुईं. छात्राओं का कहना था कि लेक्चरर को गिरफ़्तार कर उनके ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए.
आख़िरकार पुलिस उपायुक्त मधुसूदन रेड्डी के नेतृत्व में पुलिस अधिकारियों का एक दल उन्हें आसिफ़नगर पुलिस थाने ले गया. लेकिन अभी उनके ख़िलाफ़ कोई मामला दर्ज नहीं किया गया है.
इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया में हैदराबाद के आर्चबिशप मारमपुड़ी जोजी ने कहा कि छात्राओं ने लेक्चरर की टिप्पणी को ग़लत समझा है और लेक्चरर ने किसी धर्म के ख़िलाफ़ कोई बात नहीं की है.
उन्होंने कहा कि छात्राओं को कॉलेज के अनुशासन का पालन करना चाहिए. उन्होंने कहा कि हैदराबाद में दशकों से मुसलमानों और ईसाइयों में मतभेद नहीं रहा है. उन्होंने लोगों से अपील की कि वे इसे सांप्रदायिक रंग ना दें.