गुरुवार, 12 जुलाई, 2007 को 19:06 GMT तक के समाचार
श्रीलंका में तमिल विद्रोहियों ने धमकी दी है कि यदि सैन्य कार्रवाई जारी रहती है तो वे सरकार को कमज़ोर करने के लिए आर्थिक ठिकानों पर हमला शुरु कर देंगे.
तमिल विद्रोहियों की यह धमकी सरकार की उस घोषणा के बाद आई है जिसमें सरकार की ओर से कहा गया था कि देश के पूर्वी हिस्से पर सेना का कब्जा हो गया है और इसका जश्न मनाया जाएगा.
उल्लेखनीय है कि कागज़ों पर अभी भी श्रीलंकाई सेना और तमिल विद्रोहियों के बीच 2002 में हुआ संघर्ष विराम जारी है लेकिन वास्तविकता यह है कि यह समझौता कब का टूट चुका है.
तमिल विद्रोहियों की राजनीतिक इकाई के प्रमुख एसपी तमिलसेल्वन ने कहा है कि सरकार की इस घोषणा के बाद भी कि पूर्वी हिस्से पर सेना का कब्जा हो गया है, विद्रोहियों की कोई हार नहीं हुई है.
तमिल विद्रोहियों के मज़बूत गढ़ किलिनोच्ची में तमिलसेल्वन ने कहा कि तमिल विद्रोही अभी भी उत्तरी श्रीलंका के शहर और आसपास के इलाक़े पर कब्जा किए हुए हैं.
उनका कहना है कि इन इलाक़ों में पुलिस और न्यायालय सहित पूरा नागरिक प्रशासन तमिल विद्रोही ही संभाले हुए हैं.
उन्होंने धमकी देते हुए कहा कि अगर सैन्य कार्रवाई जारी रहती है तो सरकार को कमज़ोर करने के लक्ष्य से विद्रोही सरकार के आर्थिक ठिकानों पर हमला शुरु कर देंगे.
तमिल विद्रोहियों ने कहा है कि वे थल, जल और वायु तीनों तरह के हमलों से जवाब देंगे.
उल्लेखनीय है कि हाल ही में तमिल विद्रोहियों ने एक छोटे जहाज़ को बम लेजाने लायक बनाकर वायु हमलों का सिलसिला शुरु किया है.
सरकार की घोषणा
इससे पहले श्रीलंका सरकार ने घोषणा की थी कि वह सैन्य जीत का जश्न मनाने की तैयारी कर रही है क्योंकि सेना ने पूर्वी श्रीलंका में तमिल विद्रोहियों के आख़िरी ठिकाने पर भी कब्जा कर लिया है.
अधिकारियों का कहना है कि ऐसा 13 साल के इतिहास में पहली बार हुआ है तब वहाँ सेना का कब्जा हो.
उनका कहना है कि थोपिगाला पर सेना की जीत ख़ुशी का एक अवसर है.
बीबीसी संवाददाताओं का कहना है कि सेना की इस सफलता से तमिल विद्रोहियों के सपनों को झटका लगा है कि वे पूर्वी और उत्तरी श्रीलंका को तमिलों के लिए अलग देश बनाएँगे.
सेना ने देश के पूर्वी हिस्से पर नियंत्रण की कार्रवाई पिछले साल शुरु की थी.
उल्लेखनीय है कि विद्रोहियों और सेना के बीच 2005 से फिर हुए संघर्ष में कम से कम पाँच हज़ार लोगों की जानें गई हैं.
जबकि 1970 के दशक से शुरु हुए तमिल विद्रोह के बाद से अब तक साठ हज़ार से अधिक लोग मारे जा चुके हैं.