बुधवार, 11 जुलाई, 2007 को 08:31 GMT तक के समाचार
भारत के मुंबई शहर में पिछले साल हुए बम धमाकों के एक साल पूरे होने पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी है और मृतकों को श्रद्धांजलि देने के लिए कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं.
पिछले साल ग्यारह जुलाई को लोकल ट्रेनों में हुए सात बम धमाकों में 187 लोग मारे गए थे जबकि 700 लोग घायल हुए थे.
मुंबई शहर के पुलिस प्रमुख डीएन जाधव का कहना था कि अहम इमारतों, रेलवे और बस स्टेशनों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किए गए हैं.
रेल प्रशासन का संदेश
महत्वपूर्ण है कि इस मौक़े पर रेल प्रशासन उस दिन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुई सात रेल बोगियों में से दो को ठीक-ठाक कर बुधवार शाम दोबारा चलाएगा.
रेल प्रशासन का कहना है कि वह ऐसा कर निडरता का एक संदेश भेजना चाहता है.
एक सरकारी कर्मचारी अशोक सिंघल उस दिन एक ऐसी बोगी में सवार थे जिसमें धमाका हुआ. लेकिन वे बच गए. उनका कहना था, "मै उसी डिब्बे में उसी सीट पर सफ़र करने के लिए बेताब हूँ."
इस मौक़े पर मुंबई में मृतकों को श्रद्धांजलि देने के लिए कुछ कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं.
हिंदी फ़िल्म उद्योग के कुछ निर्देशक, अभिनेता और जानी-मानी हस्तियों ने दोपहर को लोखंडवाला में एक सभा का आयोजन किया है.
रेल प्रशासन ने अलग से प्रार्थना सभा का आयोजन किया है.
'लश्कर का हाथ'
सितंबर में पुलिस ने दावा किया कि इन बम धमाकों के पीछे पाकिस्तान में सक्रिय चरमपंथी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का हाथ है.
पहला धमाका खार से सांताक्रुज़ जा रही लोकल ट्रेन में हुआ था. इसके बाद माटुंगा, माहिम, बांद्रा, जोगेश्वरी, बोरेवली और मीरारोड इलाकों में लोकल ट्रेनों में धमाके हुए थे.
इस मामले में कुल 13 लोग गिरफ़्तार किए गए. जाँचकर्ताओं के मुताबिक पाकिस्तान के चीमा इन हमलों के सरगना थे. चीमा सहित 15 लोग अभी भी फ़रार और जाँचकर्ताओं के अनुसार इनमें से 10 पाकिस्तानी नागरिक हैं.
पाकिस्तान ने हमलों के तुरंत बाद न केवल इन घटनाओं की सख़्त निंदा की थी बल्कि जाँच में सहयोग करने का आश्वासन भी दिया था.
इसी महीने 28 जुलाई से इन धमाकों से संबंधित मामले की सुनवाई शुरू हो रही है.