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मंगलवार, 10 जुलाई, 2007 को 04:24 GMT तक के समाचार

लाल मस्जिद में सैनिक कार्रवाई में 58 मरे

पाकिस्तानी सेना के मुताबिक इस्लामाबाद की लाल मस्जिद पर जारी सैन्य कार्रवाई में अब तक क़रीब 50 चरमपंथी और आठ सैनिक मारे जा चुके हैं.

अधिकारियों का कहना है कि कार्रवाई में 29 सैनिक घायल हुए हैं.

लाल मस्जिद में मोर्चा जमाए चरमपंथियों से बातचीत टूटने के बाद पाकिस्तानी सेना ने मंगलवार सुबह से कार्रवाई शुरु कर दी है जो मंगलवार की रात तक जारी है.

घटनास्थल पर मौजूद पत्रकारों का कहना है कि मस्जिद परिसर के नब्बे प्रतिशत हिस्से पर सेना का नियंत्रण हो गया है और वह एक-एक करके कमरे खुलवा रही है.

पिछले आठ दिनों से लाल मस्जिद में छिपे चरमपंथियों को समर्पण करने की चेतावनी दे रही पाकिस्तानी सेना की ओर से सीधी कार्रवाई का मंगलवार को पहला दिन है.

मेजर जनरल वहीद अरशद ने मंगलवार की दोपहर प्रेस कांफ्रेंस करके बताया कि ताज़ा कार्रवाई में 50 लोगों को गिरफ़्तार भी किया गया है लेकिन अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इनमें से कितने चरमपंथी हैं.

उन्होंने बताया कि मस्जिद के उत्तरी हिस्से में सेना ने अपना प्रभाव क़ायम कर लिया है और दक्षिणी हिस्से में संघर्ष जारी है.

सेना प्रवक्ता का कहना है कि अभी कार्रवाई जारी है और चरमपंथी अभी भी महिलाओं और बच्चों को बंधक बनाए हुए हैं.

सैन्य अधिकारियों का कहना है कि 20 बच्चे चरमपंथियों के बंधन से मुक्त होकर सेना के जवानों तक सुरक्षित पहुँचने में सफल हुए हैं.

पाकिस्तान के सूचना उपमंत्री तारिक़ अज़ीम का कहना है कि सेना को मस्जिद में घुसकर कार्रवाई करने का आदेश इसलिए दिया गया क्योंकि उन्होंने बंधकों को मारना शुरु कर दिया था.

कार्रवाई

मेजर जनरल वहीद का कहना है कि ज़्यादातर चरमपंथी तहखानों में छिपे हुए हैं और वहीं से गोलीबारी कर रहे हैं और बम फेंक रहे हैं.

पत्रकारों से बात करते हुए मेजर जनरल वहीद अरशद ने बताया कि चरमपंथियों के पास रॉकेट लॉन्चर है, बंदूकें हैं, हथगोले हैं और छोटे हथियार हैं. उन्होंने कहा कि चरमपंथी पेट्रोल बम का भी इस्तेमाल कर रहे हैं.

कार्रवाई स्थल के बाहर एंबुलेंसों की कतारें लगी हुई हैं जो लगातार घायलों को और शवों को अस्पताल तक पहुँचा रही हैं. मीडिया को भी ऑपरेशन स्थल और अस्पतालों से दूर रखा गया है.

दूसरी ओर पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि लाल मस्जिद में जारी सैनिक कार्रवाई नहीं रोकी जाए.

ग़ाज़ी अब्दुल रशीद ने माँग की थी कि उन्हें और उनके हथियारबंद साथियों को मस्जिद से निकलने का सुरक्षित रास्ता दिया जाए.

सेना ने पुष्टि की है कि चरमपंथियों ने अभी भी महिलाओं और बच्चों को बंधक बना रखा है. अभी यह स्पष्ट नहीं है कि मस्जिद के भीतर कितने चरमपंथी हैं और उन्होंने कितनी महिलाओं और बच्चों को बंधक बना रखा है.

प्रयास विफल

पत्रकारों को संबोधित करते हुए पाकिस्तान के ब्रिगेडियर चीमा ने बताया कि सरकार की ओर से शांतिपूर्वक हल निकालने के लिए सभी संभव प्रयास किए गए. इसके लिए राजनीतिक प्रतिनिधियों का दल भी भेजा गया.

इसके पहले पाकिस्तान सरकार और मस्जिद में मोर्चा जमाए लोगों के बीच मंगलवार सुबह तक चली बातचीत टूट गई थी.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि लगभग 11 घंटे चली बातचीत का कोई परिणाम नहीं निकला और इसके बाद धमाकों की आवाज़ें आनी शुरू हो गईं.

संवाददाता का कहना है कि मस्जिद के अंदर मोर्चा जमाए चरमपंथी बाहर निकलने का सुरक्षित रास्ता चाहते थे जिस पर सहमति नहीं हो पाई.

सरकार की ओर से बातचीत करनेवाले दल के नेतृत्व की ज़िम्मेदारी पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी शुजात हुसैन कर रहे थे. उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में घोषणा की, ''हमने पूरी कोशिश की लेकिन बातचीत असफल रही है और मुझे इसका बेहद अफ़सोस है.''

सोमवार को राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने एक उच्च स्तरीय बैठक की थी जिसमें यह फ़ैसला किया गया कि बातचीत के लिए एक दल भेजा जाए जो मस्जिद में फंसीं महिलाओं और बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालने का प्रयास करे.