बुधवार, 11 जुलाई, 2007 को 04:02 GMT तक के समाचार
रेहाना बस्तीवाला
बीबीसी संवाददाता, मुंबई
पिछले वर्ष 11 जुलाई, 2006 को मुंबई की लोकल मैट्रो ट्रेनों में सिलसिलेवार ढंग से सात बम धमाके हुए जिनमें कम से कम 187 लोगों की मौत हो गई थी.
आम ज़िंदगी को हिला देने वाले इस हमले में 700 से ज़्यादा लोग घायल हुए थे.
पिछले एक वर्ष के दौरान इन धमाकों के सिलसिले में कुछ लोग गिरफ़्तार हुए, कुछ अभी भी फ़रार हैं और कुछ पीड़ित परिवारों को मुआवज़े बाँटे गए.
जानिए, इन हमलों और उसके एक साल बाद तक की स्थिति से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण तथ्य-
कब और कहाँ हुए विस्फोट?
तारीख- 11 जुलाई, 2006, दिन- मंगलवार,
वक्त- भारतीय समयानुसार शाम छह बजे के आसपास.
पहला धमाका खार से सांताक्रुज़ जा रही लोकल ट्रेन में हुआ.
इसके बाद माटुंगा, माहिम, बांद्रा, जोगेश्वरी, बोरेवली और मीरारोड इलाकों में लोकल ट्रेनों में धमाके हुए.
रेलवे के मुताबिक मृतकों की कुल संख्या- 187
कुल घायल- 700 लगभग
मुआवज़ा- रेलवे की ओर से 12 करोड़ रूपए मृतकों और घायलों के परिवारों को. कुछ पीड़ितों-प्रभावितों को नौकरी.
कार्रवाई
धमाकों की जाँच का काम महाराष्ट्र सरकार के आतंकवाद निरोधक दस्ते को सौंपा गया.
धमाकों के तुरंत बाद 300 लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया.
मुस्लिम इलाकों में रातों को छापे मारकर तेज़ी से धरपकड़ का भी काम शुरू हुआ जिसकी बाद में तीखी निंदा भी की गई.
21 जुलाई, 2006- मामले से संबंधित पहली गिरफ़्तारी. विशेष दस्ते ने तीन संदिग्ध लोगों को गिरफ़्तार किया. 24 जुलाई को चौथे व्यक्ति को गिरफ़्तार किया गया.
जम्मू-कश्मीर, बिहार राज्य के मधुबनी और कुछ अन्य जगहों से भी गिरफ़्तारियाँ हुईं.
कुल 13 लोग गिरफ़्तार किए गए. इनपर मकूका, पासपोर्ट क़ानून, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने जैसे अभियोग लगाए गए.
जाँचकर्ताओं के मुताबिक पाकिस्तान के चीमा इन हमलों के सरगना हैं. चीमा सहित 15 लोग अभी भी फ़रार. इनमें से 10 पाकिस्तानी.
22 सितंबर, 2006- पुलिस ने दावा किया कि इन बम धमाकों के लिए पाकिस्तान में सक्रिय चरमपंथी संगठन लश्कर-ए-तैयबा ज़िम्मेदार है.
क़ानूनी स्थिति
मामले की सुनवाई के लिए विशेष अदालत गठित.
30 नवंबर, 2006 को विशेष अदालत में 13 लोगों के ख़िलाफ़ चार्जशीट दायर.
हमलों से संबंधित 12,000 पृष्ठों वाला मामला अदालत में दाखिल किया गया.
गिरफ़्तार 13 संदिग्धों ने कुछ मानवाधिकार संगठनों को पत्र लिखकर कहा है कि पुलिस इस मामले में असली अभियुक्तों को नहीं पकड़ सकी है. इसीलिए उन लोगों के साथ थर्ड डिग्री का इस्तेमाल कर ज़बर्दस्ती ज़ुर्म कुबूल करवाया गया.
अभी तक इस मामले में कोई सुनवाई नहीं की गई है.
इसी महीने यानी 28 जुलाई, 2007 से इन धमाकों से संबंधित मामले की सुनवाई शुरू हो रही है. सुनवाई करेंगी जस्टिस मृदुला भाटकर.