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सोमवार, 09 जुलाई, 2007 को 03:39 GMT तक के समाचार

'लाल मस्जिद में मौजूद हैं चरमपंथी'

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शौकत अज़ीज़ ने कहा है कि लाल मस्जिद से हो रही कार्रवाई से यह साफ़ है कि वहाँ कुछ प्रशिक्षित चरमपंथी भी मौजूद हैं.

इस्लामाबाद स्थित लाल मस्जिद को पिछले सात दिनों से पाकिस्तानी सेना ने घेर रखा है और मस्जिद में मौजूद लोगों से आत्मसमर्पण करने को कहा जा रहा है.

शौकत अज़ीज़ ने कहा, "सही तौर पर तो यह किसी को नहीं पता है कि मस्जिद में चरमपंथी हैं पर जिस तरह की कार्रवाई उनकी तरफ से हो रही है उससे साफ है कि अंदर कुछ प्रशिक्षित चरमपंथी मौजूद हैं."

उन्होंने कहा, "जब भी ये लोग बाहर आएंगे तो पता लग जाएगा कि ये चरमपंथी कहाँ से हैं और इनमें से कितनों की प्रशासन को तलाश है."

लगभग एक सप्ताह से लाल मस्जिद और उससे संबंधित मदरसे में रहने वाले कट्टरपंथी छात्रों और सेना के बीच संघर्ष चल रहा है जिसके कारण अबतक कम से कम 21 लोग मारे जा चुके हैं.

नागरिक बंधक

इससे पहले पाकिस्तान के धार्मिक मामलों के मंत्री एजाज़ उल हक़ का कहा था कि ''इस्लामाबाद की लाल मस्जिद में ऐसे इस्लामी चरमपंथियों का कब्ज़ा है जिनकी तलाश है.''

एजाज़ उल हक़ कहना था कि लाल मस्जिद के अंदर चरमपंथियों ने महिलाओं और बच्चों को बंधक बना रखा है.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि ऐसी ख़बरें भी हैं कि मस्जिद के अंदर प्रतिबंधित जैशे मोहम्मद जैसे संगठनों का नियंत्रण है.

इस संगठन के सदस्य राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ पर हुए जानलेवा हमलों में भी शामिल रहे हैं और माना जाता है कि इसका संबंध अल क़ायदा से है.

रविवार को मस्जिद के अंदर मार्चा संभाले छात्रों ने सेना के एक लेफ्टिनेंट कर्नल अहोदे के कमांडर की गोलीमार कर हत्या कर दी थी.

दूसरी ओर मस्जिद के मौलवी अब्दुल रशीद ग़ाज़ी कह चुके हैं कि वो और उनके समर्थक आत्मसमर्पण करने के बजाए आत्महत्या करना पसंद करेंगे.

कार्रवाई में देरी

पाकिस्तान से बीबीसी संवाददाताओं के मुताबिक इस घटना से प्रभावित आम लोगों ने अब सवाल उठाना शुरू कर दिया है कि पाकिस्तान सरकार इस बारे में कोई सीधी कार्रवाई करने से क्यों कतरा रही है.

हालांकि दो दिन पहले पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने लाल मस्जिद के अंदर मौजूद कट्टरपंथी इस्लामी छात्रों को चेतावनी दी थी कि यदि वे आत्मसमर्पण नहीं करेंगे तो सैन्य कार्रवाई में मारे जाएँगे.

पर अभी तक कोई सीधी सैनिक कार्रवाई से सरकार बचती ही रही है. माना जा रहा है कि सरकार अपनी छवि बचाने और बड़े जान-माल के नुकसान को टालने के लिए ऐसा कर रही है.

मस्जिद की बिजली और पानी की सप्लाई काट दी गई है. बताया जा रहा है कि वहाँ खाने की भी कमी होने लगी है.