शनिवार, 07 जुलाई, 2007 को 11:57 GMT तक के समाचार
मणिकांत ठाकुर
बीबीसी संवाददाता, पटना
बिहार के भागलपुर ज़िले में 1989 में हुए दंगों के मामले में लगभग 18 साल के बाद दो पुलिस कर्मचारियों समेत 14 लोगों को उम्रकैद की सज़ा सुनाई गई है.
ज़िला एवं सत्र न्यायधीश शंभूनाथ मिश्र की अदालत ने इन 14 दोषी लोगों में से एक फ़रार व्यक्ति को गिरफ़्तार करने के वारंट भी जारी किए हैं.
जिन दो पुलिस कर्मचारियों को सज़ा सुनाई गई है उनमें एक - रामचंद्र सिंह, घटना के समय जगदीशपुर थाने के दारोगा थे.
भागलपुर के लोगाई गाँव में 27 अक्टूबर, 1989 को हुई दंगों में मुस्लिम समुदाय के 116 लोगों को मार कर दफ़ना दिया गया था. बाद में इनके कंकाल बरामद हुए थे.
सरकार आँकड़ों के अनुसार भागलपुर ज़िले में हुए सांप्रदायिक दंगों में कुल 1062 लोगों की मौत हुई थी.
हालांकि कुछ संगठनों का दावा है कि मरनेवालों की संख्या कहीं अधिक थी.
लोगाई का मामला
इस मामले में 24 लोगों को अभियुक्त बनाया गया था जिसमें से छह लोगों की मौत हो गई थी और चार लोग फ़रार हो गए थे.
भागलपुर दंगे 24 अक्तूबर, 1989 को राम शिलापूजन के एक जलूस पर हुए कथित हमले के बाद भड़के थे.
भागलपुर में दंगों की शुरुआत ततारपुर में एक जलूस पर हमले के बाद शुरु हुई थी.
इन दंगों के बाद पुलिस ने कुल 866 नामज़द मामले दर्ज किए थे.
अब तक 43 मामलों में 274 लोगों को दोषी पाया गया है और सज़ा सुनाई गई है.