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लाल मस्जिद में अब तक 21 जानें गईं

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में लाल मस्जिद के अंदर मौजूद हथियारबंद कट्टरपंथियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई गोलीबारी में दो और लोग मारे गए हैं.

मंगलवार से शुरू हुए टकराव में अब तक 21 लोगों की मौत हो चुकी है.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि बख़्तरबंद गाड़ियाँ और अर्धसैनिक बलों के जवानों ने लाल मस्जिद के अहाते में प्रवेश कर लिया है.

शुक्रवार को हुई ताज़ा सैनिक कार्रवाई आधे घंटे चली जिसमें दो छात्रों की मौत हो गई.

इस बीच पाकिस्तानी राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने सैनिकों को निर्देश दिया है कि वे धीरज से काम लें और अभिभावकों समय दें ताकि वे अपने बच्चों को बाहर निकाल सकें.

उन्होंने कहा कि वे इंसानी हमदर्दी की वजह से यह फ़ैसला कर रहे हैं.

मुशर्रफ़ पर हमले की ख़बर का खंडन

इससे पहले मस्जिद के मुख्य प्रबंधक अब्दुल रशीद ग़ाज़ी ने कहा है कि उनके हथियारबंद साथी आत्मसमर्पण नहीं करेंगे और हथियार डालने के बदले "लड़कर शहीद होना पसंद करेंगे."

उनका कहना है कि वह परिसर के अंदर मौजूद लड़कियों और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं.

गृह सचिव कमाल शाह का कहना है कि अब तक 1221 लोग मस्जिद से बाहर आ चुके हैं जिनमें 426 महिलाएँ हैं.

मौलाना ग़ाज़ी ने इससे पहले कहा था कि वह मस्जिद से इस शर्त पर बाहर निकल सकते हैं कि उन्हें उनकी बीमार माँ की देखभाल की अनुमति दी जाए.

लेकिन मंत्रियों ने यह शर्त मानने से इनकार कर दिया तब ग़ाज़ी ने बिना शर्त बाहर निकलने से इंकार कर दिया.

उनका कहना है, "हमने तय किया है कि हम शहीद हो जाएँगे लेकिन आत्मसमर्पण नहीं करेंगे. हम अपने सिर कटाने के लिए तैयार हैं लेकिन सिर झुकाएँगे नहीं".

हथियारबंद लोग

मस्जिद के अंदर से अब तक 1221 लोग बाहर निकल चुके हैं. लेकिन बहुत बड़ी तादाद में हथियारबंद लोग मस्जिद के भीतर मौजूद हैं.

मस्जिद के भीतर कितने हथियारबंद लोग हैं या उनके पास कितने और किस तरह के हथियार हैं इसकी कोई पक्की जानकारी नहीं मिल सकी है.

बाहर निकलने वाले छात्र-छात्राओं का कहना है कि अंदर हथियारबंद लोगों ने मोर्चा जमा रखा है और अपने माँ-बाप से मिलने के लिए बेताब लड़के-लड़कियों को बाहर नहीं जाने दे रहे हैं.

बाहर आने वालों का कहना है कि अंदर मौजूद हथियारबंद लोगों में कई विदेशी नागरिक भी हैं लेकिन पाकिस्तानी नागरिकों ने इसकी पुष्टि नहीं की है.

अब तक आत्मसमर्पण करने वाले छात्रों में से कुछ के ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज किया गया है जबकि कुछ को रिहा कर दिया गया है.

पाकिस्तानी गृह मंत्रालय के प्रवक्ता का कहना है कि "आत्मसमर्पण करने वाले लोगों के साथ क़ानून के मुताबिक़ व्यवहार किया जा रहा है."

मस्जिद के आसपास के पूरे इलाक़े की घेराबंदी करके वहाँ कर्फ्यू लगा दिया है जिसकी वजह से आम लोगों को रोज़मर्रा की चीज़ों की क़िल्लत का सामना करना पड़ रहा है.