गुरुवार, 05 जुलाई, 2007 को 20:01 GMT तक के समाचार
अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल में एक सामूहिक क़ब्र का पता चला है.
अधिकारियों का कहना है कि यह भूमिगत जेल का हिस्सा है और इसमें सैकड़ों लोगों के अवशेष हैं.
उनका कहना है कि 1980 के दशक में सोवियत कब्ज़े के दौरान उत्तरी काबुल के बाहरी हिस्से में यहाँ सेना के बैरक थे.
काबुल में आपराधिक मामलों के प्रमुख जनरल अली शाह पक्तियावल का कहना है कि जो शव मिले हैं, उनमें से कई के आँखों में पट्टी बँधी है और उनके हाथ पीछे बँधे हुए हैं.
इस सामूहिक क़ब्र के बारे में जानकारी एक सत्तर वर्षीय अफ़ग़ान ने दी जो रुसियों के लिए काम करता था और हाल ही में अफ़ग़ानिस्तान वापस लौटकर आया है.
इस क़ब्र के मिलने पर रुस की ओर से फ़िलहाल कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है.
पुलिस अधिकारी पक्तियावल ने बीबीसी से कहा, "यह रुसियों से समय का एक बड़ा सामूहिक क़ब्र है, इसमें सैकड़ों शव हैं."
उनका कहना है कि यह बड़ा सैन्य कैंप था और 15 कमरे हैं जिनमें लाशें भरी पड़ी हैं.
जिस बुज़ुर्ग ने पुलिस को इस क़ब्र तक का रास्ता बताया उसका कहना है कि उसने फ़ायरिंग स्क्वैड को लोगों को गोलियों से भूनते देखा है.
उनका कहना है कि ये शव कोई बारह साल पहले दफ़नाए गए होंगे.
इस तरह की सामूहिक क़ब्र का मिलना अफ़ग़ानिस्तान में कोई नई बात नहीं है.
दो महीने पहले ही एक सामूहिक क़ब्र में चार सौ लोगों के अवशेष मिले थे.
इससे पहले 2006 में नैटो सेनाओं ने पुल-ए-चरखी जेल में एक सामूहिक क़ब्र का पता लगाया था और कहा गया था कि वह भी सोवियत शासन के दौरान की है.