गुरुवार, 05 जुलाई, 2007 को 16:11 GMT तक के समाचार
सुशीला सिंह
बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
गुजरात के राजकोट शहर में एक महिला ने अपने पति और ससुराल वालों पर दहेज उत्पीड़न के आरोप लगाते हुए एक अलग ही ढंग से अपनी शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की है.
पूजा अर्धनग्नावस्था में सड़क पर उतर आईं और पुलिस आयुक्त के दफ़्तर के सामने न्याय की गुहार लगाने लगीं.
राजकोट निवासी अमित ने बीबीसी को बताया, "शाम को पाँच-छह बजे अर्धनग्न हालत में ये महिला सड़क पर दौड़ी जा रही थी और इन्साफ़ की गुहार लगा रही थी. वो कह रही थी कि मेरे पति और सास-ससुर को गिरफ़्तार करो."
इस हालत में ये महिला दहेज माँगे जाने और शारीरिक उत्पीड़न के ख़िलाफ़ इंसाफ़ की गुहार लगा रही थी. लेकिन एक सवाल मन को बार-बार कचोटता है कि ऐसा क्या हुआ कि इस महिला को ख़ुद को ऐसा करना पड़ा.
पीड़ित पूजा ने एक निजी टीवी चैनल को बताया,"वो मेरा पति नहीं है. मैंने कपड़े इसलिए फाड़े क्योंकि उसने नारी जाति का अपमान किया है. मैंने कहा कि उन लोगों को पकड़ो और चूड़ियाँ पहनाओ."
पूजा के मुताबिक चार साल पहले उसका प्रेम-विवाह प्रताप सिंह चौहान से हुआ था. दो साल तक सब कुछ ठीक-ठाक चलता रहा लेकिन जैसे ही पूजा की बेटी पैदा हुई तो समस्या शुरू हो गई.
पूजा का कहना है कि उस पर बेटी पैदा करने का दोष लगाया जाने लगा और अधिक दहेज लाने के लिए भी दबाव डाला जाने लगा.
स्थानीय महिला संगठन 'ममता' का कहना है कि पूजा पिछले छह महीने से पुलिस कचहरी के चक्कर लगा रही थी लेकिन उसकी फ़रियाद नहीं सुनी गई.
मामला
वहीं दूसरी ओर पुलिस का कुछ और ही कहना है. स्थानीय पुलिस के अनुसार पूजा 29 जून को अपने पति और ससुर के ख़िलाफ़ शिकायत लेकर आई थी और तीन जुलाई को पुलिस ने उन्हें गिरफ़्तार कर लिया था.
वैसे ख़बर ये भी है कि पूजा के पति और ससुर को पाँच जुलाई को अदालत ने जमानत पर रिहा कर दिया है.
गाँधी ग्राम थाने में पुलिस निरीक्षक सरदार सिंह जाला ने इस मामले पर कहा,"हमने तो पूजा के ससुराल पक्ष के लोगों को तीन जुलाई को ही ग़िरफ़्तार कर लिया था. लेकिन इसके बावजूद उसने ये हरकत की. उसकी दिमागी हालत ठीक नहीं है."
गुजरात के एक छोटे से शहर की ये घटना अब राष्ट्रीय अख़बारों और सामाचार चैनलों की सुर्ख़ियाँ बन गई है. ये मामला राष्ट्रीय महिला आयोग के पास भी पहुँच चुका है.
राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्षा गिरिजा व्यास ने कहा,"जब ये लोग फ़रियाद लेकर थाने जाते हैं तो इनकी प्राथमिकी नहीं लिखी जाती. हमने इस घटना को संज्ञान में लिया है और उसके मानसिक और शारीरिक उपचार के लिए कहा है. और साथ ही उसकी सुरक्षा के लिए भी प्रशासन को लिख दिया है."
दहेज़ के लिए महिलाओं को मारना-पीटना कोई नई बात नहीं है.
अगर गृह मंत्रालय की संस्था 'राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड्स ब्यूरो' के आंकड़ों पर नज़र डालें तो पता चलता है कि दहेज की वजह से छह हज़ार से अधिक महिला मारी जा चुकीं हैं और दहेज़ उत्पीड़न के 58 हज़ार से ज़्यादा मामले दर्ज हो चुके हैं.
क़ानून
ऐसा नहीं है कि दहेज उत्पीड़न के ख़िलाफ़ क़ानून नहीं है.
दहेज निरोधक क़ानून-1961 में दो बार पहले ही संशोधन किए जा चुके हैं. ऐसा माना जा रहा है कि मानसून सत्र में दहेज प्रथा के ख़िलाफ़ ज़्यादा सख़्त और नया क़ानून लाया जाएगा.
लेकिन इतना सब होने के बावज़ूद ऐसे मामले सामने आते रहते हैं.
महिला कार्यकर्ता रंजना कुमारी कहती हैं,"दहेज के लिए महिलाओं का बहुत उत्पीड़न होता है. वो बहुत बेइज़्ज़ती महसूस करती हैं. उत्पीड़ित औरतें कुछ ऐसा करना चाहती हैं जिससे वो दहेज उत्पीड़न करने वालों को सामने ला सकें. इसीलिए उसने ऐसा कदम उठाया है."
एक समय था जब मशहूर नृत्यांगना प्रतिमा बेदी ने अर्ध नग्न होकर पूरे देश को चौंका दिया था. उनका मक़सद था महिला सशक्तीकरण की मिसाल पेश करना.
लेकिन पूजा की घटना कुछ और ही दर्शाती है.