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बुधवार, 04 जुलाई, 2007 को 18:31 GMT तक के समाचार

'सर्वोच्च पद की गरिमा कम न करें'

यूपीए-वामदलों की ओर से राष्ट्रपति पद की प्रत्याशी प्रतिभा पाटिल ने आख़िरकार अपनी चुप्पी तोड़ी और कहा है कि उनके ख़िलाफ़ लगाए जा रहे आरोप 'दुर्भावना से प्रेरित' हैं.

उन्होंने कहा है कि 19 जुलाई को राष्ट्रपति पद के लिए होने वाले चुनाव के लिए प्रचार करते हुए देश के सर्वोच्च पद की गरिमा कम नहीं की जानी चाहिए.

नामांकन वापस लिए जाने का समय ख़त्म होने के बाद जारी एक बयान में उन्होंने पहली बार एनडीए के आरोपों का जवाब दिया है.

उल्लेखनीय है कि उन पर कथित तौर पर एक बैंक का कर्ज़ न चुकाने से लेकर हत्या के कथित मामले में अपने भाई को बचाने तक कई आरोप लगाए गए हैं.

हालांकि कांग्रेस के नेता लगातार एनडीए के आरोपों का खंडन करते रहे थे लेकिन प्रतिभा पाटिल ने चुप्पी साध रखी थी.

अपने एक पेज के लिखित बयान में प्रतिभा पाटिल ने कहा है, "अपने पाँच दशक के सार्वजनिक जीवन में मैं हमेशा अपनी आत्मा की आवाज़ पर काम करती रही हूँ. मेरे ख़िलाफ़ लगाए गए सभी आरोप दुर्भावना से प्रेरित हैं और सभी का जवाब दे दिया गया है."

राजस्थान की राज्यपाल पद से इस्तीफ़ा देकर राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ रहीं 72 वर्षीय प्रतिभा पाटिल ने कहा है, "चुनाव प्रचार के दौरान न प्रत्यक्ष और न परोक्ष रुप से देश के सर्वोच्च पद की गरिमा कम नहीं की जानी चाहिए."

आडवाणी ने लिखी चिट्ठी

उधर भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने भैरोंसिंह शेखावत का प्रचार शुरु करते हुए बुधवार को सभी मतदाताओं को भेजे जाने के लिए एक पत्र लिखा है.

इस पत्र की विशेषता यह है कि इसे लालकृष्ण आडवाणी ने अपने हाथों से लिखा है.

इस पत्र में आरोप लगाया गया है कि यूपीए-वामदलों ने राष्ट्रपति पद के लिए ऐसे उम्मीदवार का चयन किया है जिनकी निष्ठा सोनिया गाँधी के प्रति है न कि संविधान के प्रति.

उन्होंने सवाल पूछा है कि दाग़ी मंत्रियों के सवाल पर पहले एनडीए राष्ट्रपति के पास जाकर गुहार लगाता रहा है अब जब राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार ही दाग़ी हैं तो शिकायत किससे की जाएगी.