बुधवार, 04 जुलाई, 2007 को 23:22 GMT तक के समाचार
पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद स्थित लाल मस्जिद से कई विस्फोटों और भारी गोलीबारी की आवाज़े सुनाई पड़ी हैं.
इस मस्जिद को पिछले दो दिनों से सुरक्षाबलों ने घेर रखा था.
मस्जिद के भीतर से मदरसे के छात्र सुरक्षाबलों का विरोध कर रहे हैं और इसी विरोध के चलते मंगलवार को दोनों और से गोलीबारी हुई थी जिसमें कम से कम दस लोग मारे गए थे.
इसके बाद सरकार की ओर से विद्रोही छात्रों से हथियार छोड़कर आत्मसमर्पण करने को कहा गया था.
बुधवार की शाम तक कोई एक हज़ार लोग आत्मसमर्पण कर चुके थे लेकिन सैकड़ों हथियार बंद लोगों के मस्जिद के भीतर ही होने की शंका जताई गई थी.
इस बीच मस्जिद के प्रमुख प्रबंधक मौलाना अब्दुल अज़ीज़ को बुर्क़ा पहनकर भागने की कोशिश में गिरफ़्तार कर लिया गया.
सुरक्षाबलों की ओर से कहा गया था अगर ज़रूरी हुआ तो मस्जिद के भीतर कार्रवाई की जाएगी.
लेकिन वहाँ गुरुवार को तड़के तक कोई कार्रवाई नहीं की गई थी लेकिन तड़के विस्फोटों और गोलीबारी की आवाज़ें सुनाई पड़ने लगीं.
उल्लेखनीय है कि लाल मस्जिद और प्रशासन के बीच लंबे अरसे से टकराव चलता रहा है, इस कट्टरपंथी मस्जिद के छात्र और उसके प्रबंधन से जुड़े लोगों की माँग रही है कि इस्लामाबाद में शरिया का़नून को पूरी तरह लागू कराया जाए.
पाकिस्तान के राष्ट्रपति जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ की इस बात को लेकर निंदा होती रही है कि वे लाल मस्जिद के प्रशासन पर अंकुश नहीं लगा पा रहे हैं.
तनाव
मंगलवार को मस्जिद के एक मदरसे में पढ़ने वाली लड़कियो ने प्रदर्शन किया था और छात्रों ने गोलीबारी की थी.
इसके बाद मस्जिद के आसपास के पूरे इलाक़े में कर्फ़्यू लगा दिया गया था और वातावरण में बहुत तनाव बना हुआ था. सरकार बुधवार को दिन भर लोगों से हथियार डालने की अपील करती रही.
लेकिन सुरक्षाबलों का कहना है कि ज़्यादातर हथियारबंद लोग बाहर नहीं निकले.
पाकिस्तानी सरकार ने घोषणा की थी कि स्वेच्छा से बाहर निकलने वालों के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी और उनकी पढ़ाई का बेहतर बंदोबस्त किया जाएगा.
लाल मस्जिद के मौलाना अब्दुल रशीद ग़ाज़ी ने बीबीसी उर्दू से टेलीफ़ोन पर हुई बातचीत में कहा कि मस्जिद में कोई छात्र हथियारबंद नहीं हैं बल्कि वे मस्जिद के गार्ड थे.
उन्होंने कहा, "मंगलवार की फ़ायरिंग सुरक्षा बलों ने शुरू की थी और अब वे मदरसे का नाम बदनाम कर रहे हैं, हमारी तरफ़ से बाद में गोलियाँ चलाई गईं थी अपनी हिफ़ाज़त में."
उन्होंने इन आरोपों का खंडन किया कि बाहर निकलने की इच्छा रखने वाले छात्रों को जबरन रोका जा रहा है.