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बुधवार, 04 जुलाई, 2007 को 13:03 GMT तक के समाचार

उमर फ़ारूक़
बीबीसी संवाददाता, हैदराबाद

आंध्र प्रदेश में मुसलमानों को आरक्षण

आंध्र प्रदेश सरकार ने सामाजिक और शैक्षणिक तौर पर पिछड़े मुसलमानों के पंद्रह समुदायों को चार प्रतिशत आरक्षण देने की घोषणा की है.

आंध्र प्रदेश की कांग्रेस सरकार पिछले तीन वर्षों से पिछड़े मुसलमानों को आरक्षण दिलाने का प्रयास करती रही है, वर्ष 2004 के चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने अपने घोषणापत्र में मुसलमानों को आरक्षण दिलाने का वादा किया था.

राज्य कैबिनेट की एक बैठक में यह फ़ैसला किया गया जिसकी अध्यक्षता मुख्यमंत्री वाइएस राजशेखर रेड्डी ने की.

ये पंद्रह समुदाय उन चार 'ए' 'बी' 'सी' 'डी' समूहों के अतिरक्त होंगे इसलिए इन्हें कैटेगरी 'ई' में रखा गया है.

इस व्यवस्था के तहत आर्थिक रूप से बेहतर हालत वाले परिवार के सदस्यों को लाभ नहीं मिलेगा, जिन परिवारों की वार्षिक आमदनी ढाई लाख रुपए से ऊपर है उन्हें इसके तहत आरक्षण नहीं मिलेगा.

राज्य के सूचना मंत्री ए रामनारायण रेड्डी ने पत्रकारों को बताया सरकार एक विधेयक लाने जा रही है ताकि इसी शैक्षणिक सत्र से आरक्षण की व्यवस्था लागू की जा सके.

प्रस्तावित विधेयक के मसौदे को भी कैबिनेट ने इसी बैठक में तत्काल मंज़ूरी देकर उसे राज्यपाल के पास भेज दिया है.

इस नए बनाए गए 'ई' वर्ग के छात्रों को मेडिकल, डेंटल और इंजीनियरिंग कॉलेजों में दाख़िले में आरक्षण का लाभ मिल सकेगा.

अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री मोहम्मद अली शब्बीर ने कहा कि इस फ़ैसले के बाद राज्य की 85 प्रतिशत मुस्लिम आबादी आरक्षण के दायरे के भीतर आ गई है.

राज्य की कुल आठ करोड़ की आबादी में दस प्रतिशत मुसलमान हैं या लगभग अस्सी लाख, मोहम्मद अली शब्बीर का कहना है कि राज्य के कुल 60 लाख मुसलमानों को आरक्षण का लाभ मिलेगा.

पंद्रह समुदाय

इन पंद्रह समुदायों की पहचान उनके पेशे और सामाजिक-आर्थिक पिछड़ेपन के आधार पर की गई है जिनमें सैयद, मुग़ल, ईरानी, बोहरा, और पठान जैसे समुदायों को नहीं रखा गया है.

जिन समुदायों को चार प्रतिशत आरक्षण मिलेगा उनमें धोबी, कसाई, नाई, संगतराश और इत्रफ़रोश वगैरह शामिल हैं.

पूरे मुसलमान समुदाय को धर्म के आधार पर पाँच प्रतिशत आरक्षण देने के आंध्र प्रदेश सरकार के फ़ैसले पर पिछले वर्ष अदालत ने रोक लगा दी थी जिसके बाद राज्य सरकार ने पीएस कृष्णन समिति का गठन किया था जिसने मुसलमानों के बीच सामाजिक-शैक्षणिक तौर पर पिछड़े लोगों की एक सूची बनाई है.

कृष्णन समिति की सूची के आधार पर ही पंद्रह समुदायों को 'ई' वर्ग में रखा गया है

आंध्र प्रदेश में पिछड़ी जातियों के लिए 25 प्रतिशत, अनुसूचित जातियों के लिए 14 प्रतिशत, जनजातियों को सात प्रतिशत आरक्षण दिया गया है जो कुल मिलाकर 46 प्रतिशत है.

अब इस चार प्रतिशत आरक्षण के नए प्रावधान के बाद राज्य में 50 प्रतिशत आरक्षण होगा जो कि संविधान में तय सीमा से अधिक नहीं है.

राज्य सरकार का कहना है कि यह आरक्षण पहले की तरह धर्म के आधार पर नहीं बल्कि सामाजिक-शैक्षणिक पिछड़ेपन के आधार पर दिया गया है.