मंगलवार, 03 जुलाई, 2007 को 23:15 GMT तक के समाचार
पाकिस्तान सरकार का कहना है कि उसने इस्लामाबाद की लाल मस्जिद के छात्रों से कहा है कि वे अपने हथियार डाल दें.
इस बीच सरकार ने मस्जिद के आसपास के इलाक़े में कर्फ़्यू लागू कर दिया है और लाल मस्जिद की बिजली काट दी है.
सरकार ने आदेश दिए हैं कि जो कोई भी मस्जिद से हथियार के साथ बाहर आता दिखाई देगा, उसे गोली मार दी जाएगी.
उल्लेखनीय है कि मंगलवार को दिन में लाल मस्जिद के बाहर छात्रों और सुरक्षाकर्मियों के बीच गोलीबारी में कम से कम 10 लोग मारे गए थे, जिनमें दो छात्र, एक सैनिक और एक पत्रकार शामिल हैं.
पाकिस्तान के आंतरिक मामलों के उपमंत्री ने पत्रकार वार्ता में नौ लोगों के मारे जाने और 140 से ज़्यादा के घायल होने की पुष्टि की.
हालांकि कई रिपोर्टों में मृतकों की संख्या ज़्यादा बताई जा रही है. एपी के मुताबिक आस-पास के अस्पतालों में करीब 60 लोगों का इलाज चल रहा है.
दिन में कई घंटों तक चली गोलीबारी के बाद गोलीबारी थमी.
बीबीसी से बात करते हुए सूचना मंत्री तारिक़ अज़ीम ने कहा है कि यदि ज़रुरत पड़ी तो सुरक्षाबल मस्जिद पर हमला भी करेंगे.
विवाद
कट्टरपंथी मानी जाने वाली लाल मस्जिद के छात्रों और सुरक्षा बलों के बीच टकराव तब शुरू हुआ जब सुरक्षाबलों ने बैरिकेड को मस्जिद तक आगे बढ़ाने की कोशिश की.
छात्रों ने इसका विरोध किया और फिर सड़कों पर निकली मदरसे की छात्राओं को तितर-बितर करने के लिए आँसू गैस के गोलों का प्रयोग किया गया.
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इसके बाद मस्जिद के अंदर से कुछ छात्रों ने गोलियाँ चलाईं जिससे अर्धसैनिक बल रेंजर्स के एक जवान की मौत हो गई.
रेंजर्स के जवान के मारे जाने के बाद सेना ने लाल मस्जिद को चारों तरफ़ से घेर लिया और दोनों तरफ़ से जमकर गोलीबारी हुई.
पिछले कई महीनों से लाल मस्जिद और उससे जुड़े दो मदरसों के छात्रों का टकराव पाकिस्तान सरकार से जारी है.
लाल मस्जिद से जुड़े धार्मिक नेताओं की माँग है कि पाकिस्तान की राजधानी में इस्लामी क़ानून शरिया पूरी तरह लागू किया जाए.
कई आलोचकों ने सरकार की निंदा की है कि इस्लामाबाद में स्थिति से कड़ाई से नहीं निपटा गया.
पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ पहले कह चुके हैं कि आत्मघाती हमलों की आशंका के चलते सुरक्षाकर्मी मस्जिद में छापा नहीं मार सकते.
बीबीसी संवाददाताओं के मुताबिक मस्जिद से जुड़े लोग सुरक्षाबल में रसूख़ वाले कई लोगों को जानते हैं जिस वजह से अधिकारी कोई क़दम नहीं उठा पाए हैं.
लेकिन संवाददाताओं का कहना है कि अब जब झड़पों में लोग मारे गए हैं, तो हालात मस्जिद के नेताओं के ख़िलाफ़ जा सकते हैं.