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मंगलवार, 03 जुलाई, 2007 को 19:48 GMT तक के समाचार

नेपाल में 'देवी' को बर्ख़ास्त किया

नेपाल में एक 'देवी' की पदवी छीनकर उसे बर्खास्त कर दिया गया है.

उन पर आरोप है कि उन्होंने परंपरा को तोड़कर अमरीका की यात्रा की.

बर्ख़ास्त की गई 'देवी' का नाम सजनी शाक्य है और उनकी उम्र है दस वर्ष.

वह नेपाल की सबसे पूज्यनीय तीन कुमारियों में से एक हैं. कुमारियों को हिंदू और बौद्ध दोनों एक जैसा सम्मान देते हैं.

कई तरह की परीक्षाओं पर खरा उतरने के बाद दो वर्ष की उम्र में सजनी शाक्य को 'कुमारी' चुना गया था और उनसे उम्मीद थी कि रजस्वला होने से पहले (यानी मासिकधर्म शुरु होने से पहले) तक वह उत्सवों में हिस्सा लेगी और भक्तों को आर्शीर्वाद देती रहेंगीं.

लेकिन उनकी अमरीका यात्रा ने मंदिर के वरिष्ठ लोगों को नाराज़ कर दिया.

सजनी काठमांडू के पड़ोस भक्तपुर की 'कुमारी' हैं और हाल ही में एक डॉक्यूमेंट्री के प्रचार के लिए अमरीका गई थीं.

मंदिर के बुज़ुर्गों का कहना है कि अमरीका की यात्रा करने से सजनी की पवित्रता नष्ट हो गई है और अब वे उसकी उत्तराधिकारी की तलाश करेंगे.

सजनी नेपाल की कई कुमारियों में से एक हैं और शीर्ष तीन में भी एक जिन्हें नेपाल से बाहर जाने की अनुमति नहीं है.

32 गुणों वाली

उल्लेखनीय है कि एक ख़ास बौद्ध संप्रदाय से कुमारियों का चयन किया जाता है, जब उनकी उम्र दो से चार वर्ष के बीच होती है.

परंपराओं के अनुसार किसी भी 'कुमारी' में 32 गुणों का होना अनिवार्य माना जाता है, जिसमें हिरणों की तरह की जांघ और शंख की तरह की गर्दन शामिल है.

'कुमारी' को अपने महल के भीतर ही रहना होता है और उसे साल में तीन या चार बार ही बाहर आने का मौक़ा मिलता है.

वह रजस्वला होने तक कुमारी रह सकती है और इससे पहले दूसरी कुमारी यानी उत्तराधिकारी ढूँढ़ लेना ज़रुरी होता है.

कुमारी के बाहर जाने का सबसे बड़ा अवसर तब होता है जब वर्षा शुरु होती है.

परंपरा है कि कुमारी के पैर ज़मीन पर नहीं लगने चाहिए और इसलिए उसके लिए हमेशा कालीन बिछाई जाती है.

उल्लेखनीय है कि इस कुमारी प्रथा का विरोध भी होता रहा है और पिछले साल नवंबर में सुप्रीम कोर्ट ने जाँच के आदेश दिए थे कि कहीं कुमारी प्रथा के पीछे लड़कियों का शोषण तो नहीं होता.