मंगलवार, 03 जुलाई, 2007 को 12:29 GMT तक के समाचार
नारायण बारेठ
बीबीसी संवाददाता, राजस्थान
राजस्थान सरकार ने ज़हरीली शराब से होने वाली मौतों को रोकने के लिए क़ानून को सख़्त बना दिया है. इस अपराध के लिए उम्र क़ैद की सज़ा का प्रावधान किया गया है.
इसके अलावा नए क़ानून के तहत दोषी व्यक्ति को अधिकतम दस लाख रुपए जुर्माना और पीड़ित पक्ष को मुआवजा देने का प्रावधान भी किया गया है.
हालाँकि विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि सरकार खुद ही शराब की बिक्री को प्रोत्साहित कर रही है.
राज्य में पिछले तीन साल में विषैली शराब से अनेक मौतें हुई हैं.
संसदीय कार्यमंत्री राजेंद्र राठौड़ का कहना है, "क़ानून में कड़े प्रावधान करने से ऐसी दुखांतिकाओं पर रोक लगेगी."
शराब की माया
आबकारी विभाग के अतिरिक्त आयुक्त अशोक भंडारी ने बीबीसी को बताया, "राष्ट्रपति से स्वीकृति के बाद क़ानून तुरंत प्रभाव से लागू हो गया है. राजस्थान में आबकारी ऐसा मद है जो सरकार को दूसरा सबसे अधिक राजस्व मुहैया कराता है."
पिछले वर्ष राजस्थान सरकार ने आबकारी विभाग से डेढ़ हज़ार करोड़ रुपए का राजस्व हासिल किया था.
सरकार ने आबकारी क़ानून में सोलह संशोधन किए हैं.
नए प्रावधानों के मुताबिक ज़हरीली शराब के सेवन से मौत के मामले में शराब बनाने या उपलब्ध कराने वाले को उम्र क़ैद और अधिकतम दस लाख रुपए के जुर्माने के साथ पीड़ित पक्ष को दो से तीन लाख रुपए तक का मुआवजा देने को कहा जा सकता है.
अब आबकारी अपराध में सरकार का पक्ष सुने बगैर अग्रिम जमानत नहीं हो सकेगी.
अवैध शराब को लाने, ले-जाने और कब्जे में रखने पर कम-से-कम छह माह की सज़ा भुगतनी होगी.
भंडारी ने कहा, "कुछ प्रावधान भारतीय दंड विधान की धाराओं के मुक़ाबले कठोर बनाए गए हैं, ताकि शराब के ग़ैरक़ानूनी प्रचलन पर रोक लगे."
विपक्ष का रुख़
राज्य कांग्रेस के उपाध्यक्ष रघु शर्मा कहते हैं कि भाजपा धर्म का सहारा लेकर वोट हासिल करती है और सत्ता में आने पर शराब को प्रोत्साहित करती है.
वो कहते हैं, "भाजपा के कार्यकाल में शराब का कारोबार खूब फला-फूला और कई ग़रीब लोगों को जान गँवानी पड़ी. जहरीली शराब की त्रासदी क़ानून से नहीं, सरकार की मंशा से रुकेगी."
राजस्थान में लोग हर साल सात करोड़ लीटर देशी शराब, ढाई करोड़ लीटर भारत में बनी विदेशी मदिरा गटक जाते हैं.
राज्य में बीयर का उपभोग भी बढ़ा है. लोग साल भर में छह करोड़ लीटर बीयर पी जाते हैं.
कीमत में आंके तो लोग हर साल लगभग 413 करोड़ रुपए की भारत में बनी विदेशी शराब, 380 करोड़ रुपए की बीयर और 876 करोड़ रुपए की देशी शराब हलक में उतार जाते हैं.