मंगलवार, 03 जुलाई, 2007 को 10:49 GMT तक के समाचार
पाकिस्तान में अधिकारियों का कहना है कि इस्लामाबाद में लाल मस्जिद के बाहर छात्रों और सुरक्षाकर्मियों के बीच गोलीबारी में कम से कम 10 लोग मारे गए हैं.
मरने वालों में दो छात्र, एक सैनिक और एक पत्रकार शामिल है.
पाकिस्तान के आंतरिक मामलों के उप मंत्रि ने पत्रकार वार्ता में नौ लोगों के मारे जाने और 140 से ज़्यादा के घायल होने की पुष्टि की.
हालांकि कई रिपोर्टों में मृतकों की संख्या ज़्यादा बताई जा रही है. एपी के मुताबिक आस-पास के अस्पतालों में करीब 60 लोगों का इलाज चल रहा है.
मंगलवार को लाल मस्जिद के छात्रों ने पर्यवारण मंत्रालय की एक इमारत को भी आग लगा दी.
दिन में कई घंटों तक चली गोलीबारी के बाद अब जाकर संघर्षविराम हुआ है.
लाल मस्जिद के बाहर मौजूद बीबीसी के शोएब हसन का कहना है कि मुत्तहिदा मजलिसे अमल (एमएमए) के एक राजनेता ने संघर्षविराम पर मध्यस्तथा की.
'जल्दबाज़ी नहीं'
उधर बीबीसी से बातचीत में पाकिस्तान के सूचना मंत्री मोहम्मद अली दुर्रानी ने संकेत दिया कि सरकार जल्दबाज़ी में कोई क़दम नहीं उठाएगी और विचार-विमर्श चल रहा है कि स्थिति से कैसे निपटा जाए.
कट्टरपंथी मानी जाने वाली लाल मस्जिद के छात्रों और सुरक्षा बलों के बीच टकराव तब शुरू हुआ जब सड़कों पर निकली मदरसे की छात्राओं को तितर-बितर करने के लिए आँसू गैस के गोलों का प्रयोग किया गया.
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इसके बाद मस्जिद के अंदर से कुछ छात्रों ने गोलियाँ चलाईं जिससे अर्धसैनिक बल रेंजर्स के एक जवान की मौत हो गई.
रेंजर्स के जवान के मारे जाने के बाद सेना ने लाल मस्जिद को चारों तरफ़ से घेर लिया और दोनों तरफ़ से जमकर गोलीबारी हुई.
पिछले कई महीनों से लाल मस्जिद और उससे जुड़े दो मदरसों के छात्रों का टकराव पाकिस्तान सरकार से जारी है.
लाल मस्जिद से जुड़े धार्मिक नेताओं की माँग है कि पाकिस्तान की राजधानी में इस्लामी क़ानून शरिया पूरी तरह लागू किया जाए.
कई आलोचकों ने सरकार की निंदा की है कि इस्लामाबाद में स्थिति से कड़ाई से नहीं निपटा गया.
पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ पहले कह चुके हैं कि आत्मघाती हमलों की आशंका के चलते सुरक्षाकर्मी मस्जिद में छापा नहीं मार सकते.
बीबीसी संवाददाताओं के मुताबिक मस्जिद से जुड़े लोग सुरक्षाबल में रसूख़ वाले कई लोगों को जानते हैं जिस वजह से अधिकारी कोई क़दम नहीं उठा पाए हैं.
लेकिन संवाददाताओं का कहना है कि अब जब झड़पों में लोग मारे गए हैं, तो हालात मस्जिद के नेताओं के ख़िलाफ़ जा सकते हैं.