सोमवार, 02 जुलाई, 2007 को 11:08 GMT तक के समाचार
भारत के पूर्वोत्तर राज्य असम में भारतीय खाद्य निगम(एफ़सीआई) के एक अधिकारी की हत्या के विरोध में कंपनी के कर्मचारियों ने कामकाज बंद कर दिया है.
एफ़सीआई में अधिकारी पीसी राम की उल्फ़ा विद्रोहियों ने हत्या कर दी है. उनका शव असम-भूटान सीमा पर मिला.
उल्फ़ा विद्रोहियों ने उनका अप्रैल में अपहरण कर लिया था. पीसी राम असम में एफ़सीआई में क्षेत्रिय निदेशक थे.
उल्फ़ा की माँग थी कि पीसी राम को रिहा करने के बदले उनके दो कमांडरों को छोड़ा जाए.
लेकिन असम सरकार ने उल्फ़ा की ये माँग ठुकरा दी और पीसी राम को ढूँढने की कोशिश तेज़ कर दी गई.
असम के उप पुलिस प्रमुख डीके पाठक ने कहा, "उल्फ़ा ने शायद उनकी हत्या इसलिए की क्योंकि सुरक्षा बलों ने विद्रोहियों को बुरी तरह घेर लिया था और उनमें से चार को गिरफ़्तार भी कर लिया गया था."
'असुरक्षा की भावना'
अपने सहयोगी की हत्या के विरोध में एफ़सीआई के कर्मचारियों ने सभी पूर्वोत्तर राज्यों में काम बंद कर दिया है.
एफ़सीआई मज़दूर संघ के महासचिव ताहिर अहमद ने कहा, "पीसी राम हमारे क्षेत्रीय प्रमुख थे और अगर सरकार उनकी रक्षा करने में असमर्थ रही, ऐसे में तो हम सब असुरक्षित हैं क्योंकि हमारे कई सहयोगी दूर-दराज़ के क्षेत्रों में काम करते हैं जहाँ विद्रोही काफ़ी सक्रिय हैं."
1990 के बाद से पीसी राम तीसरे ऐसे हाई-प्रोफ़ाइल व्यक्ति हैं जिनका उल्फ़ा ने अपहरण किया और फिर उन्हें मार दिया.
1991 में विद्रोहियों ने रूसी कोयला विशेषज्ञ सर्गेइ ग्रिटचेंको की हत्या कर दी थी.
छह साल बाद उल्फ़ा ने भारतीय सामाजिक कार्यकर्ता संजय घोष का असम से अपहरण किया और उनकी हत्या कर दी गई.
उल्फ़ा का आरोप है कि केंद्रीय सरकार राज्य के प्राकृतिक संसाधनों का दोहन कर रही है और स्थानीय लोगों को नज़रअंदाज़ किया जा रहा है.
भारत सरकार और विद्रोहियों के बीच कुछ समय के लिए संघर्षविराम था लेकिन बातचीत सितंबर में टूट गई थी