रविवार, 01 जुलाई, 2007 को 15:40 GMT तक के समाचार
अल्ताफ़ हुसैन
बीबीसी संवाददाता, श्रीनगर
भारी बारिश के कारण बाधित हुई अमरनाथ यात्रा रविवार से दोबारा शुरू हो गई है.
मौसम के हाल में सुधार आने के बाद पहलगाम और बालतल से एक साथ यह यात्रा दोबारा शुरू की गई.
रविवार को छह हज़ार से अधिक यात्री 14 हज़ार फुट की ऊँचाई वाले कठिन रास्ते पर दोबारा चल पड़े, इन यात्रियों में हर आयुवर्ग के लोग शामिल हैं.
घाटी में अलगाववादी हिंसा की घटनाओं के शुरू होने के बाद से पिछले 18 वर्षों से अमरनाथ यात्रा विशेष तौर पर चर्चा में रही है क्योंकि कई बार इस यात्रा में बाधा डालने के प्रयास किए गए.
इस यात्रा की सुरक्षा के लिए हर वर्ष सेना विशेष प्रबंध करती है लेकिन इस वर्ष असली चिंता सुरक्षा को लेकर नहीं है.
अधिकारी बर्फ़ की कमी और अपेक्षाकृत तापमान की अधिकता के कारण शिवलिंग की ऊँचाई कम होने को लेकर चिंतित हैं. कई यात्री भी इस स्थिति से निराश और परेशान हैं.
चंदनवाड़ी वह जगह है जहाँ से यात्री पैदल या घोड़े पर बैठकर पवित्र गुफा तक जाते हैं, गुफा के दर्शन करके लौट रहे कई यात्रियों ने इस बात की पुष्टि की कि शिवलिंग काफ़ी तेज़ी से पिघल रहा है.
दिल्ली से आए हरीश कुमार ने कहा, "मुझे बीएसएफ़ के जवानों ने बताया कि शिवलिंग रोज़ एक-एक फुट छोटा होता जा रहा है. कुछ दिनों में पिघलकर समाप्त भी हो सकता है. जब मैंने देखा तो शिवलिंग दो फुट का था, मुझे बताया गया कि कल यह तीन फुट का था, यानी यह तेज़ी से छोटा हो रहा है."
नासिक से पिछले बारह साल से अमरनाथ आ रहे गिरीश वडनरकर ने कहा, "मैंने 2005 में सबसे बड़ा शिवलिंग देखा था जो 14 फुट ऊँचा था जबकि 1999 में शिवलिंग बना ही नहीं था."
ज्यादातर यात्रियों ने इंतज़ाम और सुविधाओं की प्रशंसा की और कहा कि उन्हें कोई तकलीफ़ नहीं होने दी जा रही.
पिछले वर्ष तीन लाख यात्रियों के अमरनाथ गुफा के दर्शन किए और इस वर्ष चार लाख लोगों के आने संभावना व्यक्त की जा रही है.