शनिवार, 30 जून, 2007 को 06:27 GMT तक के समाचार
जम्मू कश्मीर में स्थित हिंदुओं के तीर्थस्थान अमरनाथ में बर्फ़ से प्राकृतिक रुप से बनने वाला शिवलिंग लगातार पिघल रहा है.
अमरनाथ में तीर्थयात्री इसी शिवलिंग के दर्शन के लिए जाते हैं.
पहलगाम के पहाड़ों में स्थित अमरनाथ की गुफ़ा तक की तीर्थयात्रा शनिवार, 30 जून से ही शुरु होनी थी लेकिन ख़राब मौसम के कारण इसे स्थगित कर दिया गया है.
अधिकारियों का कहना है कि लगातार हो रही बारिश के कारण रास्ता बंद करना पड़ा है.
यात्रा शुरु करने की नई तारीख़ फ़िलहाल घोषित नहीं की गई है.
पिघलता शिवलिंग
अमरनाथ का पिघलता शिवलिंग इस तीर्थस्थल के प्रभारी अधिकारियों ने लिए चिंता का विषय बना हुआ है.
गुफ़ा से जाकर लौटे अमरनाथ धाम बोर्ड के अधिकारियों ने बीबीसी को बताया कि लिंग का आकार घट रहा है.
उनका कहना है कि गर्मी की वजह से बर्फ़ से प्राकृतिक रुप से बनने वाला लिंग पिघल रहा है.
बीबीसी संवाददाता बीनू जोशी का कहना है कि मार्च में शिवलिंग की जो तस्वीरें आईं थीं उसमें शिवलिंग काफ़ी बड़ा दिखाई पड़ रहा था.
उनका कहना है कि एक दो दिन पहले जो तस्वीरें आई हैं उसमें उसका आकार काफ़ी कम दिखाई दे रहा है और उसका आकार भी टेड़ा सा है.
उल्लेखनीय है कि शिवलिंग पिछले साल भी पिघल गया था और मंदिर प्रशासन ने कथित रुप से बर्फ़ डालकर कृत्रिम शिवलिंग बना दिया था ताकि तीर्थयात्री दर्शन कर सकें.
इसे लेकर विवाद भी हुआ था और प्रशासन को जाँच के आदेश देने पड़े थे.
ख़राब मौसम
ख़राब मौसम के कारण 30 जून से शुरु होने वाली तीर्थयात्रा स्थगित कर दी गई है.
बीबीसी संवाददाता के अनुसार तीर्थ यात्रियों को जम्मू के बेस कैंप में रोक दिया गया है.
बेस कैंप से तीर्थयात्री दो रास्तों से साढ़े बारह हज़ार फुट ऊँचे अमरनाथ गुफ़ा तक पहुँचते हैं.
एक रास्ता पहलगाम से होकर जाता है जिसमें 45 किलोमीटर की पैदल यात्रा करनी पड़ती है और दूसरा रास्ता बालटाल से होकर जाता है.
बालटाल का रास्ता दुर्गम है लेकिन इस रास्ते से एक दिन में जाकर वापस लौटा जाता सकता है.
अधिकारियों ने कहा है कि फ़िलहाल एक दिन के लिए यात्रा स्थगित की है और अगर मौसम साफ़ हुआ तो रविवार को पहला दल रवाना किया जाएगा.
अमरनाथ यात्रा दो माह तक चलेगी और अगस्त में श्रावण पूर्णिमा के दिन यह ख़त्म होती है.