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शुक्रवार, 29 जून, 2007 को 08:15 GMT तक के समाचार

नारायण बारेठ
बीबीसी संवाददाता, जयपुर

अविवाहितों का सहारा 'महिला सदन'

समाज में कम होती लड़कियों की संख्या से परेशान लोग अब दुल्हन की चाह में समाज कल्याण विभाग के 'महिला सदन' का दरवाजा खटखटाने लगे हैं.

राजस्थान में जयपुर के 'महिला सदन' में रह रही विवाह योग्य 11 लड़कियों के लिए कोई 300 युवक वरमाला लेकर तैयार खड़े थे.

लेकिन इनमें से 289 लोगों को वापस लौटना पड़ा.

इन युवतियों की गुरुवार को जयपुर में धूमधाम से शादी कर दी गई.

विवाह स्थल पर वैदिक मंत्र गूंजे तो कुरान की आयतें भी पढ़ी गईं.

दुल्हनों में से दो युवतियाँ मुसलमान थीं.

समाज कल्याण विभाग के अतिरिक्त निदेशक एमएस काला कहते हैं,"यह एक तरह का स्वयंवर था क्योंकि लड़कियों ने आवेदक युवकों में से अपनी पसंद का साथी चुना."

सरकार का 'महिला सदन' उन महिलाओं का अस्थायी बसेरा है जो या तो लावारिस छोड़ दी गईं हैं या किसी मुसीबत की मारी हैं.

राजस्थान के समाज कल्याण मंत्री मदन दिलावर ख़ुद इस विवाह समारोह में शामिल हुए और इंतज़ामों में हाथ बँटाया.

सामाज कल्याण मंत्री ने स्वीकार किया कि लड़कियों की घटती संख्या से समाज कल्याण विभाग के पास आवेदकों की संख्या बढ़ गई है.

उन्होंने कहा,"राजस्थान में लड़कियों की कम होती संख्या से यहाँ शादी की इच्छा से आने वालों युवकों की संख्या बढ़ती जा रही है. हमें इस विसंगति को रोकने के लिए लड़कियों के संरक्षण की कोशिश तेज़ करनी होगी."

सहयोग

सरकार ने प्रति युगल दस हज़ार रुपए का विवाह खर्च मंज़ूर किया तो दान पुण्य में भरोसा करने वाले लोगों ने नवविवाहित जोड़ों के लिए गृहस्थी का ज़रूरी सामान जुटाया.

नवविवाहित माशूक जयपुर में कशीदे का काम करता है. यहाँ शादी के बाद प्रसन्न माशूक ने कहा,"मेरी ख़्वाहिश थी कि किसी ग़रीब ज़रूरतमंद के साथ निकाह करूँ. अल्लाह ने मेरी मुराद पूरी कर दी."

दुल्हन बनी गीता का हाथ थामे खड़े जयपुर के मनीष ने कहा,"मुझे सादगी से विवाह की चाहत थी, यहाँ वैसा ही हुआ."

समाज कल्याण विभाग के श्री एमएस काला ने बीबीसी को बताया,"इन लड़कियों के लिए तीन सौ अर्ज़ियाँ आईं थीं. दो बार छंटनी के बाद 32 आवेदकों को चयनित किया गया. इन 32 लोगों में से 11 लड़कों को विवाह के लिए चुना गया. शादी के लिए लड़कियों की रज़ामंदी प्रमुख थी. यह सारा काम चयन मंडल की देखरेख में हुआ."

भव्य भोज और मंगल गीतों के बीच विवाह संपन्न हुआ.

दुल्हनों को विदा होकर घर जाने की खुशी थी तो महिला सदन की सहेलियों से बिछड़ने का दर्द भी.

विदाई की बेला आई तो दुल्हन अमीरन कहने लगी,"यह हमारा मायका है."

राजस्थान में एक हज़ार मर्दों की तुलना में औरतों की संख्या 922 है. लेकिन कुछ ज़िलों, समुदायों और जातियों में तो यह अनुपात और भी कम है.