सोमवार, 25 जून, 2007 को 18:28 GMT तक के समाचार
रामदत्त त्रिपाठी
बीबीसी संवाददाता, लखनऊ
उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने विधान परिषद उपचुनाव में नामांकन दाखिल कर प्रेक्षकों को चौंका दिया है.
जिन दो सीटों के लिए उपचुनाव हो रहे हैं, उनमें से एक में मायावती स्वंय उम्मीदवार हैं.
दूसरी सीट के लिए स्वामी प्रसाद मौर्य को उम्मीदवार बनाया गया है.
मायावती इस समय राज्यसभा की सदस्य हैं और स्वामी प्रसाद मौर्य विधानसभा का चुनाव हार गए थे.
संविधान के अनुसार कोई भी शख्स छह महीने तक बिना विधायक बने मंत्री रह सकता है.
मायावती का कहना है, '' मेरे लिए विधानसभा चुनाव लड़ना कोई मुश्किल काम नहीं है. लेकिन किसी एक विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने पर विपक्षी नेताओं को यह आरोप लगाने का मौक़ा मिल जाता कि मैं एक क्षेत्र का विकास करूंगी.''
उनका कहना था कि वो पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह की तरह नहीं बनना चाहती हैं. मुलायम सिंह ने जहाँ से चुनाव जीता वहीं अधिकांश पैसा खर्च किया और बाकी क्षेत्रों के विकास पर कोई ध्यान नहीं दिया.
बहरहाल मायावती के इस फ़ैसले से राजनीतिक प्रेक्षकों को आश्चर्य हुआ है.
संवाददाताओं का कहना है कि विधानसभा चुनाव में बहुमत मिलने के तुरंत बाद फतेहपुर की खागा सीट के चुनाव में बसपा हार गई थी.
शायद इसलिए मायावती नहीं चाहती हैं कि वो इस वक्त चुनाव लड़ें और विपक्ष उनके ख़िलाफ़ एकजुट हो जाए.
ये भी कहा जा रहा है कि मायावती ने अपने मंत्रिमंडल और प्रशासन में इस बार जिस तरह से सवर्ण समुदाय को विशेष महत्व दिया है, उससे दलितों में बेचैनी है.
मायावती सरकार में कैबिनेट मंत्री सतीश मिश्र और अनंत कुमार मिश्र भी विधायक नहीं हैं.
देखना ये है कि इन दोनों मंत्रियों को विधानसभा चुनाव लड़ाया जाएगा या इनके लिए भी पिछले दरवाज़े से विधान परिषद में जगह बनाई जाएगी.