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ब्रह्मोस को शामिल करने की तैयारी

सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल ब्रह्मोस को गुरुवार को भारतीय थल सेना में शामिल कर लिया जाएगा. इसके कई परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे किए जा चुके हैं.

यह मिसाइल एक समारोह में थल सेना प्रमुख जनरल जेजे सिंह को सौंपी जाएगी.

इस मौक़े पर राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम, रक्षा मंत्री एके एंटनी और वित्त मंत्री पी चिदंबरम मौजूद रहेंगे.

कलाम उन प्रमुख लोगों में शामिल थे जिन्होंने रूस के साथ ब्रह्मोस परियोजना की शुरुआत की थी और रूसी सरकार के साथ समझौते पर भारतीय वैज्ञानिक सलाहकार की हैसियत से हस्ताक्षर किए थे.

भारतीय नौसेना में इस मिसाइल को पहले ही शामिल किया जा चुका है.

ब्रह्मोस थलसेना में शामिल होने वाला तीसरी मिसाइल है.

थलसेना में सतह से सतह पर मार करने वालीं पृथ्वी और अग्नि मिसाइलें पहले ही शामिल की जा चुकी हैं.

मारक ब्रह्मोस

इस मिसाइल की मारक क्षमता लगभग 290 किलोमीटर है.

इसका पहली बार परीक्षण 12 जून, 2001 में किया गया था. मिसाइल के जमीनी संस्करण का उड़ीसा की चांदीपुर रेंज में 22 अप्रैल को 14वां परीक्षण किया गया.

आठ मीटर लंबी इस मिसाइल का वज़न तीन टन है. इसकी गति ध्वनि से कहीं ज़्यादा लगभग 2.823 मैक है.

ब्रह्मोस मिसाइल को ज़मीन, पनडुब्बी, जहाज और विमान से प्रक्षेपित किया जा सकता है और ये 200 से लेकर 300 किलोग्राम तक के पारंपरिक हथियार ले जा सकती है.

ब्रह्मोस मिसाइल को रक्षा अनुसंधान विकास संगठन (डीआरडीओ) और रूस का एनपीओ माशिनिस्त्रोयेमिया मिलकर विकसित कर रहे हैं.

इसका नाम भारत की ब्रह्मपुत्र और रूस की मस्कवा नदियों के नाम पर रखा गया है.