बुधवार, 20 जून, 2007 को 18:16 GMT तक के समाचार
श्याम सुंदर,
बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी की नेता और जनवादी महिला समिति की अध्यक्ष सुभाषिणी अली का कहना है कि यूपीए वाममोर्चा की राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार प्रतिभा पाटिल की इतिहास की जानकारी त्रुटिपूर्ण है.
आप की बात बीबीसी के साथ कार्यक्रम में के दौरान उन्होंने कहा कि हाल ही मे पर्दाप्रथा को ले कर प्रतिभा पाटिल का बयान आया उससे ये लगता है कि वो भी इतिहास को ले कर कई भ्रांतियों का शिकार हैं.
उल्लेखनीय है कि प्रतिभा पाटिल ने कुछ दिन पहले राजस्थान में एक सभा के दौरान कहा था कि भारत में पर्दा प्रथा की शुरुआत मुग़लों से बचने के लिए हुई थी.
इस बयान को लेकर कुछ मुस्लिम संगठनों ने प्रतिभा पाटिल की आलोचना की थी और इस पर काफ़ी विवाद भी हो गया था.
सुभाषिणी अली का कहना था कि प्रतिभा पाटिल की इतिहास की जानकारी ग़लत है और उन्हें ऐसे बयान देने से पहले सोचना चाहिए था.
सुभाषिणी अली ने यह भी माना की वामपंथी पार्टियों को गृहमंत्री शिवराज पाटिल के नाम पर इसलिए एतराज़ था क्योंकि उन्हें लगता है की शिवराज पाटिल धर्मनिरपेक्षता के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध नही हैं.
कार्यक्रम में हिस्सा लेते हुए राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी एनडीए की प्रवक्ता सुषमा स्वराज ने ये दावा किया की उनके प्रत्याशी भैंरोसिंह शेखावत की जीत निश्चित है और राष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए दूसरी पार्टियों के सांसदों और विधायकों को तोड़ना अनैतिक नहीं है.
हालाँकि दोनों ही नेताओं का मानना था कि प्रतिभा पाटिल के राष्ट्रपति बनने से आम भारतीय महिला का सशक्तिकरण हो जाएगा ये मानना तो सही नहीं है, पर सुभाषिणी अली का कहना था कि महिलाओं के योगदान को स्वीकार करते हुए अगर देश का सर्वोच्च पद किसी महिला को दिया जा रहा है तो ये एक सकारात्मक शुरूआत है.
जब एक श्रोता ने ये पूछा कि जिस समय अमरीका जैसा देश महिला राष्ट्रपति चुनने की बात पर बहस कर रहा है और भारत एक महिला को राष्ट्रपति चुनने के एकदम क़रीब है तो क्यों सभी राजनितिक दल सर्वसम्मति नहीं बना सकते. इस पर सुषमा स्वराज का कहना था की प्रतिभा पाटिल अगर यूपीए की पहली पसंद होती तो शायद इस पर विचार हो सकता था.