मंगलवार, 19 जून, 2007 को 15:09 GMT तक के समाचार
पाकिस्तान में ब्रिटेन के उच्चायुक्त रॉबर्ट ब्रिंकली ने अंग्रेज़ी भाषा के साहित्यकार सलमान रुश्दी को नाइटहुड के ख़िताब से सम्मानित किए जाने पर पाकिस्तान के एक मंत्री के बयान पर 'गहरी चिंता' जताई है.
पाकिस्तान के धार्मिक मामलों के मंत्री मोहम्मद एजाज़ुल हक़ ने कहा था कि सलमान रुश्दी को यह सम्मान दिए जाने से आत्मघाती हमले बढ़ने की आशंका है क्योंकि मुसलमानों का मानना है कि सलमान रुश्दी ने इस्लाम की तौहीन की है.
लेकिन ब्रितानी उच्चायुक्त रॉबर्ड ब्रिंकली का कहना है कि यह सही नहीं है कि सलमान रुश्दी को नाइटहुड का सम्मान इस्लाम की तौहीन करने के इरादे से दिया गया है.
सर सलमान रुश्दी की पुस्तक सैटानिक वर्सेज़ ने 1989 में ख़ासा विवाद खड़ा कर दिया था और दुनिया भर में विरोध प्रदर्शन हुए थे. ईरान ने तो सलमान रुश्दी की मौत का फ़तवा जारी कर दिया था.
'तौहीन वाली पुस्तक'
ब्रिटेन सरकार के एक प्रवक्ता ने कहा कि "उच्चायुक्त ने इस बात को स्पष्ट कर दिया है कि पाकिस्तान के धार्मिक मामलों के मंत्री ने जो बयान दिया है उस पर ब्रिटेन सरकार बहुत चिंतित है."
प्रवक्ता ने कहा, "ब्रिटेन सरकार इस बारे में बिल्कुल स्पष्ट मत रखती है कि कोई भी ऐसी बात नहीं है जिससे आत्मघाती हमलों को जायज़ ठहराया जा सका."
ईरान में सलमान रुश्दी की हत्या का फ़तवा जारी किया गया था. ईरान के कुछ परंपरावादी लोगों ने भी सलमान रुश्दी को सर की उपाधि दिए जाने के फ़ैसले की आलोचना की है.
ईरान की संसद के प्रथम डिप्टी स्पीकर मोहम्मद रज़ा बहोनर ने संसद में कहा, "सलमान रुश्दी एक ऐसी बदबूदार लाश बन चुके हैं जिसे किसी भी कार्रवाई से सही नहीं किया जा सकता."
उच्चायुक्त तलब
इससे पहले रुश्दी को 'सर' की उपाधि दिए जाने पर विरोध प्रकट करने के लिए पाकिस्तान सरकार ने इस्लामाबाद में ब्रिटेन के उच्चायुक्त को तलब किया.
सोमवार को पाकिस्तान की संसद ने एक प्रस्ताव पारित कर सलमान रुश्दी को 'सर' का ख़िताब देने का विरोध किया था.
संसद की ओर से पारित प्रस्ताव में माँग की गई है कि सलमान रूश्दी को दिया गया सम्मान वापस ले लिया जाए. पारित प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि रुश्दी को सम्मानित करने से 'मुसलमानों की भावनाएँ आहत हुई हैं.'
दरअसल, पिछले सप्ताह ही सलमान रूश्दी को ब्रिटेन ने उनके लेखन के लिए नाइटहुड से सम्मानित किया था. सम्मान की घोषणा के बाद ही इसका ईरान और पाकिस्तान में व्यापक विरोध शुरू हो गया था.
इस्लामाबाद में तैनात ब्रितानी उच्चायुक्त रॉबर्ट ब्रिंकली ने सोमवार को इस सम्मान को सही ठहराते हुए रुश्दी के पक्ष में टिप्पणी की थी जिसके बाद यह विवाद और तेज़ हो गया था.
सलमान के सम्मान पर विवाद ऐसे समय में हो रहा है जब उन्होंने मंगलवार यानी 19 जून को ही अपने जीवन के 60 वर्ष पूरे किए हैं.
विवाद
सलमान रुश्दी में 1989 में लिखी गई 'सैटेनिक वर्सेस' नाम की किताब लिखी थी जिसका दुनिया के कई देशों में भारी विरोध हुआ था और भारत सहित कई देशों ने उस पर पाबंदी लगा दी थी.
ईरान ने भी ब्रिटेन के इस फ़ैसले की आलोचना की करते हुए कहा था कि सलमान रुश्दी को सम्मान देने से पता चलता है कि ब्रितानी प्रशासन में 'इस्लाम फ़ोबिया' कितना गहरा है.
इस पर ब्रितानी विदेश मंत्रालय ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि सलमान रुश्दी इस सम्मान के सच्चे हक़दार हैं.
60 वर्षीय सलमान रुश्दी का जन्म भारत में हुआ था, उनकी चौथी किताब 'सैटानिक वर्सेस' में अच्छाई और बुराई के बीच की काल्पनिक लड़ाई दिखाई गई है जिसमें धर्म, इतिहास, दर्शन और फैंटसी का इस्तेमाल किया गया है.
सलमान रुश्दी ने इस सम्मान के लिए ब्रितानी सरकार के प्रति आभार प्रकट किया है और इसे अपनी लेखनी को मिली पहचान बताया है.