रविवार, 17 जून, 2007 को 00:33 GMT तक के समाचार
विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा है कि पूर्वी पड़ोसी देशों के साथ भारत की कैसी विदेश नीति हो इसके बारे पूर्वोत्तर राज्यों की सरकारों से विचार-विमर्श किया जाएगा.
इसे एक बड़ा क़दम बताया जा रहा है क्योंकि ऐसे अवसर कम ही रहे हैं जब केंद्र सरकार ने विदेश नीति के निर्धारण में राज्य सरकारों की भूमिका की बात कही हो.
प्रणव मुखर्जी ने कहा कि पूर्वोत्तर राज्यों का आर्थिक विकास केंद्र सरकार की प्राथमिकता है मगर इसके साथ ही देश की सुरक्षा का भी पूरा ध्यान रखा जाएगा.
उन्होंने कहा कि विकास और सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना बहुत ज़रूरी है.
मुखर्जी ने कहा कि भारत की पूर्वी पड़ोसियों से ताल्लुक़ात बढ़ाने की 'लुक ईस्ट' नीति को आगे बढ़ाने की ज़रूरत है क्योंकि इससे पूर्वोत्तर राज्यों को आर्थिक लाभ होगा.
प्रणव मुखर्जी ने ये बातें पूर्वोत्तर राज्य मेघालय की राजधानी शिलौंग में कही हैं जहाँ बीबीसी के संवाददाता सुबीर भौमिक भी मौजूद थे.
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि विदेश मंत्री पूर्वी पड़ोसी देशों चीन, बांग्लादेश, भूटान और बर्मा से व्यापार तो बढ़ाना चाहते हैं लेकिन नशीले पदार्थों की तस्करी और चरमपंथियों की घुसपैठ को लेकर चिंतित भी हैं.
प्रणव मुखर्जी ने कहा, "हम उत्पादों, सेवाओं, विचारों और लोगों की बेरोकटोक आवाजाही चाहते हैं लेकिन हम नशीले पदार्थों की बेरोकटोक आवाजाही बर्दाश्त नहीं कर सकते."
प्रणव मुखर्जी ने कहा कि सुरक्षा और व्यापारिक विकास के लिए ज़रूरी माहौल बनाने के बीच कोई विरोधाभास नहीं है, उन्होंने कहा कि दोनों दिशाओं में साथ-साथ काम हो सकता है.
विदेश मंत्री का कहना था कि सिर्फ़ तस्करी और चरमपंथ के डर से सीमा को बंद करके रखना तथा व्यापार को रोकना कोई समझदारी का काम नहीं है.
विदेश मंत्री रविवार को इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता पहुँच रहे हैं जहाँ वे राष्ट्रपति सहित कई वरिष्ठ नेताओं से मुलाक़ात के बाद सिंगापुर के लिए रवाना होंगे.