शनिवार, 16 जून, 2007 को 05:01 GMT तक के समाचार
यूपीए की ओर से राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार के रुप में प्रतिभा पाटिल को चुने जाने के बाद शिवसेना असमंजस में है.
अब उसे समझ में नहीं आ रहा है कि वह महाराष्ट्र को प्राथमिकता दे या फिर हिंदुत्व को.
फ़िलहाल शिवसेना ने एनडीए के उम्मीदवार भैरोंसिंह शेखावत को समर्थन देने न देने का फ़ैसला 19 जून तक टाल दिया है.
उल्लेखनीय है कि प्रतिभा पाटिल ने पूरे जीवन महाराष्ट्र की राजनीति की है. वे वहाँ पाँच बार विधायक रही हैं और कैबिनेट मंत्री भी.
हालांकि उनका विवाह राजस्थान में हुआ लेकिन वे रही महाराष्ट्र में ही. पिछले कुछ बरसों से वे राजस्थान में राज्यपाल की तरह ज़रुर पदस्थ थीं.
शुक्रवार को मुंबई में शिवसेना की बैठक के बाद यह तय नहीं हो सका कि राष्ट्रपति पद के लिए किसे समर्थन दिया जाए.
लोकसभा के पूर्व अध्यक्ष मनोहर जोशी ने कहा, "अभी हम सोच रहे हैं कि मराठी को प्राथमिकता दें या हिंदुत्व को."
उल्लेखनीय है कि शिवसेना महाराष्ट्र की हिंदूवादी पार्टी है और भारतीय जनता पार्टी से उसका गठबंधन विचारधारा में समानता की वजह से हुआ था.
दूसरे स्थानीय स्तर पर शिवसेना अपने आपको मराठी भाषी लोगों का सबसे बड़ा हितैषी बताती है और माँग करती रही है कि सभी ओहदों में मराठियों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए.
ऐसे में जब भाजपा की ओर से अटल बिहारी वाजपेयी घोषणा कर चुके हैं कि वे यूपीए की उम्मीदवार प्रतिभा पाटिल का समर्थन नहीं करेंगे, शिवसेना के लिए निर्णय लेना कठिन हो गया है.
तीसरा मोर्चा चुप
हालांकि एनडीए ने अभी अपने उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है लेकिन माना जा रहा है कि वे निर्दलीय चुनाव लड़ने की घोषणा कर चुके उपराष्ट्रपति भैरोंसिंह शेखावत के साथ ही जाएँगे.
लेकिन हाल ही में गठित आठ पार्टियों के तीसरे मोर्चे ने अभी भी अपने पत्ते नहीं खोले हैं.
इस मोर्चे में समाजवादी पार्टी, तेलगूदेशम पार्टी, एआईडीएमके और राष्ट्रीय लोकदल जैसे महत्वपूर्ण दल शामिल हैं.
मोर्चे की बैठक सोमवार 18 जून को होने जा रही है और इसके बाद ही वे घोषणा करेंगे कि उनका समर्थन किसे होगा.
इस बीच यूपीए की ओर से इस मोर्चे के दलों को मनाने की कोशिशें चल रही हैं.