गुरुवार, 14 जून, 2007 को 13:06 GMT तक के समाचार
मुंबई में 1993 में हुए बम धमाकों के अभियुक्त सलीम शेख़ को उम्र क़ैद की सज़ा सुनाई गई है. इस मामले में अदालत ने पहली बार दो महिलाओं को पाँच-पाँच साल की सज़ा सुनाई है.
मुंबई में 1993 में हुए सिलसिलेवार धमाकों में 253 लोग मारे गए थे और 713 लोग घायल हुए थे.
अदालत अब तक 75 दोषियों को सजा सुना चुकी है.
टाडा अदालत में न्यायाधीश पीके कोडे ने कहा कि धमाकों के मुख्य अभियुक्त टाइगर मेमन की तरफ़ से लालच दिए जाने पर मुबीना भिवंडीवाला ने अपना घर धमाकों की योजना बनाने के लिए इस्तेमाल होने दिया.
विशेष टाडा अदालत ने मुबीना भिवंडीवाला और ज़ेबुनिसा क़ाज़ी को पांच-पाँच साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है.
अदालत ने कहा कि भिवंडीवाला को साज़िश की जानकारी थी क्योंकि उसका मकान मेमन के घर के पास ही है.
सज़ा सुनाए जाने के बाद भिवंडीवाला ने न्यायाधीश और सरकारी वकील उज्ज्वल निकम से भावुक अपील करते हुए कहा कि उसे किसी और की कारगुज़ारियों की सजा दी जा रही है.
कारावास की सजा के साथ-साथ भिवंडीवाली पर 25 हज़ार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है.
दूसरी महिला अभियुक्त ज़ेबुनिसा क़ाजी को भी एक लाख रुपए का जुर्माना जमा कराने को कहा गया है.
आरोप
क़ाजी के ऊपर एके-56 राइफ़ल सहित दूसरे हथियार और ग्रेनेड रखने का आरोप था. उन्होंने ये हथियार भगोड़े अभियुक्त अनीस इब्राहिम कासकर के कहने पर रखे थे.
अदालत का कहना था कि ये हथियार मंज़ूर अहमद सैय्यद और अबू सलेम लेकर आए थे जिन पर अभी मुकदमा चलाया जाना बाकी है.
न्यायाधीश कोडे का कहना था कि हथियार काज़ी के घर पर रखे गए थे. उस दौरान हथियारों पर मालिकाना हक़ किसी और का ही रहा.
न्यायालय का यह भी कहना था कि काज़ी ने विभिन्न ठिकानों तक हथियार पहुँचाने में कोई सहायता नहीं की.
इस मामले की अभियुक्त तीन महिलाओं में से भिवंडीवाला और काज़ी को सज़ा सुनाए जाने के बाद सिर्फ़ रुबीना मेमन ही बचीं हैं.
विशेष टाडा अदालत ने सलीम शेख़ को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाते हुए उन पर एक लाख चालीस हज़ार रुपए का जुर्माना भी लगाया है.
शेख़ पर आरोप है था कि जब गाड़ियों में आरडीएक्स भरा जा रहा था उस समय सलीम शेख़ समय टाइगर मेमन के घर पर मौजूद था.
कोर्ट ने शेख़ को अवैध पिस्तौल रखने का भी दोषी पाया है.