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गुरुवार, 14 जून, 2007 को 15:21 GMT तक के समाचार

फर्ज़ी मुठभेड़ मामले में नार्को टेस्ट नहीं

गुजरात की एक स्थानीय अदालत ने सोहराबुद्दीन फर्ज़ी मुठभेड़ कांड के सिलसिले में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी डीजी वंजारा सहित छह पुलिसकर्मियों का नार्को टेस्ट करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है.

गुजरात पुलिस के अपराध अन्वेषण विभाग (सीआईडी) ने अदालत से अपील की थी कि इन पुलिस अधिकारियों का नार्को टेस्ट करने की अनुमति दी जाए.

नार्को टेस्ट के तहत संदिग्ध अपराधियों को एक रसायन का डोज़ दिया जाता है जिसके बाद वे अर्धचेतन अवस्था में आ जाते हैं, जिसके बाद उनसे पूछताछ की जाती है.

अपराध की जाँच की दिशा में इसे कारगर उपाय माना जाता है लेकिन अदालत में सबूत के तौर पर इसे स्वीकार नहीं किया जाता.

सीआईडी ने जिन छह पुलिस अधिकारियों के नार्को टेस्ट की अर्ज़ी दी थी उसमें से तीन आईपीएस अधिकारी हैं-- डीजी वंजारा, राजकुमार पांडियान और दिनेश कुमार.

तीन अन्य पुलिस अधिकारी हैं--एनएच डाभी, संतराम शर्मा और अजय परमार. इन सभी छह लोगों को पुलिस की नौकरी से निलंबित किया जा चुका है.

प्रावधानों के मुताबिक़, किसी भी व्यक्ति का नार्को टेस्ट उसकी सहमति के बिना नहीं किया जा सकता, इनमें से किसी व्यक्ति ने नार्को टेस्ट के लिए अपनी सहमति नहीं दी थी.

दूसरी ओर सीआईडी की दलील थी कि नार्को टेस्ट से यह पता चल सकेगा कि राज्य पुलिस ने किस मक़सद से सोहराबुद्दीन शेख़ और उनकी पत्नी क़ौसर बी की हत्या की थी.

सोहराबुद्दीन शेख़ की वर्ष 2005 में हत्या कर दी गई थी, बाद में जाँच से पता चला था कि यह मुठभेड़ फर्ज़ी थी.

इस मामले की सीबीआई जाँच कराने की अपील सुप्रीम कोर्ट में की गई थी लेकिन देश की सर्वोच्च अदालत ने निर्देश दिया था सीआईडी की वरिष्ठ अधिकारी गीता जौहरी ही मामले जाँच करें.