गुरुवार, 14 जून, 2007 को 07:50 GMT तक के समाचार
राष्ट्रपति जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ के भविष्य पर अमरीका के बयान का पाकिस्तान के विपक्षी दल पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) ने स्वागत किया है.
गुरुवार को अमरीकी विदेश विभाग की ओर से बयान आया था कि वे मानते हैं कि राष्ट्रपति मुशर्रफ़ अपने पद पर फिर से चुने जाने की प्रक्रिया संसदीय चुनाव के बाद ही शुरु करेंगे, न कि चुनाव के पहले.
पीपीपी के प्रवक्ता फ़रहातुल्ला बाबर ने कहा है कि उनकी पार्टी की भी यही माँग रही है.
हालांकि पाकिस्तान के दूसरे विपक्षी दल इस मामले में एहतियात के साथ चल रहे हैं.
अमरीकी विदेश विभाग का बयान ऐसे समय में आया जब अमरीकी अधिकारी रिचर्ड बाउचर पाकिस्तान के चुनाव अधिकारियों से मिल रहे थे.
रिचर्ड बाउचर ने बुधवार को विदेश मंत्री ख़ुर्शीद क़सूरी से भी मुलाक़ात की थी.
उल्लेखनीय है कि 1999 में तख़्तापलट करने के बाद राष्ट्रपति बने मुशर्रफ़ अपने राजनीतिक जीवन का सबसे कड़ी चुनौती का सामना कर रहे हैं.
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश इफ़्तिख़ार चौधरी की बर्खास्तगी का विरोध पाकिस्तान में लोकतंत्र समर्थक आंदोलन में बदल चुका है.
विश्लेषकों का मानना है कि जनरल मुशर्रफ़ अपने पद पर फिर चुने जाने की प्रक्रिया संसद में चुनाव से पहले ही पूरा कर लेना चाहेंगे और वे चुनाव के बाद के गठित होने वाली संसद में इस प्रक्रिया के लिए जाने का ख़तरा मोल नहीं लेना चाहेंगे.
बीबीसी संवाददाताओं का कहना है कि रिचर्ड बाउचर का चुनाव अधिकारी से मिलना अहम है.
समझा जाता है कि इस मुसाक़ात में बाउचर ने स्वतंत्र चुनाव को लेकर अमरीका की भावनाओं से चुनाव अधिकारी को अवगत करवा दिया है.
वैसे इस समय पाकिस्तान में बहस का सबसे बड़ा मुद्दा परवेज मुशर्रफ़ की दोहरी भूमिका है. एक तो वे सेना के प्रमुख हैं और फिर राष्ट्रपति हैं.
पिछले दिनों परवेज़ मुशर्रफ़ ने संकेत दिए थे कि वे दोनों ही पदों पर बने रहना चाहते हैं.