निष्ठा चुघ
बीबीसी हिंदी
दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली सरकार और तिहाड़ जेल के अधिकारियों से पिछले एक सप्ताह में तिहाड़ जेल के सात क़ैदियों की मौत के बारे में जवाब तलब किया है.
बुधवार को हाईकोर्ट में दायर की गई एक जनहित याचिका में तिहाड़ जेल में हुई इन मौतों पर सवाल उठाया गया. इस पर अदालत ने अधिकारियों से इस मामले में सफ़ाई मांगी है.
तिहाड़ जेल के हालात को 'दयनीय' बताते हुए जस्टिस जे पी सिंह और जस्टिस मुरलीधर ने अधिकारियों को अपना जवाब 18 जून तक देने का निर्देश दिया है.
लेकिन जेल अधिकारी अब तक यही दावा कर रहे हैं कि इन सात क़ैदियों की मौत बढ़ती गर्मी के कारण हुई है.
बुधवार को तिहाड़ जेल में एक वॉर्डन की मौत हो गई थी. जेल के अधिकारियों का कहना है कि वॉर्डन की मौत शरीर में पानी की कमी के कारण हुई.
लेकिन जनहित याचिकाकर्ता एस सी जैन का कहना है कि 7 जून से 11 जून के बीच हुई मौतों के पीछे कुछ और कारण हैं जिसकी जाँच की जानी चाहिए.
उनके अनुसार जेल में स्थिति बहुत शोचनीय है और पानी की 50 प्रतिशत आपूर्ति काट दी गई है जिसके कारण क़ैदियों के लिए मुश्किलें और भी बढ़ गई हैं.
मौत का कारण
लेकिन जेल की पूर्व महानिदेशक किरण बेदी का कहना था कि दिल्ली में इतनी असहनीय गर्मी पड़ रही है कि जेल के बाहर भी लोगों की मौत हो रही है.
किरण बेदी का कहना था,'' तिहाड़ जेल की परिस्थितियों को देखते हुए क़ैदियों के लिए गर्मी झेलना और भी चुनौती भरा है. वहाँ नीची छत वाले बैरक हैं और क्षमता से ज़्यादा कैदी होने की वजह से गर्मी और भी असहनीय हो सकती है.''
तिहाड़ जेल एशिया की सबसे बड़ी जेल है और उसमें फिलहाल 10 हज़ार क़ैदी रखे जा रहे हैं जो क्षमता से कहीं अधिक हैं.
लेकिन उत्तर भारत में गर्मी में कोई नई बात नहीं है, तो क्या जेल को इसे ध्यान में रखते हुए इंतज़ाम नहीं करने चाहिए थे.
इसके जवाब में तिहाड़ जेल की अधिकारी के रूप में लंबा समय बीता चुकीं किरण बेदी का कहना था कि जेल में उचित इंतज़ाम किए जाते हैं.
उनका कहना था,'' मेरे समय में क़ैदियों के बीच नीबू और ठंडा पानी बांटा जाता था. ज़रूरत पड़ने पर पानी का टैंकर भी मंगवाया जाता था. लेकिन ताज़ा मौतें किस वजह से हुईं हैं, इसका जवाब तो जांच के बाद ही पता चल पाएगा.''
लेकिन बेदी ने ये ज़रूर माना कि जेल में ज़रुरत से ज़्यादा कैदी होना उनके स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर ख़तरा है.