रविवार, 10 जून, 2007 को 11:50 GMT तक के समाचार
नारायण बारेठ
बीबीसी संवाददाता, जयपुर
राजस्थान में गूजरों के आरक्षण आंदोलन के दौरान सुर्खियों में आए कर्नल (रिटायर्ड) किरोड़ी सिंह बैंसला को पुस्तकें बहुत पसंद हैं.
अपनी नेतृत्व क्षमता से सियासत और सत्ता के गलियारों में हलचल मचा चुके बैंसला ने पिछले दिनों ही कुछ पुस्तकें खरीदी, जिनमें पीसी अलेक्जेंडर की 'कॉरिडोर्स ऑफ़ पावर' भी शामिल है.
बैंसला कहते हैं, "मुझे अच्छी पुस्तकें हमेशा आकर्षित करती हैं. किताबें मेरी जिंदगी का अभिन्न हिस्सा हैं और मैं रोज़ाना चार घंटे किताबों के साथ गुजारता हूँ."
शास्त्रों से दोस्ती
आंदोलन की अगुवाई, सैन्य पृष्ठभूमि और पुस्तकों के प्रति अनुराग. फौज से सेवानिवृत्ति के साथ ही शस्त्र पीछे छूट गए और अब इस पूर्व सैन्य अधिकारी के पास साहित्य और शास्त्र रह गए हैं.
आंदोलन की वापसी के ऐलान के साथ ही बैंसला करोली ज़िले के हिंडोन सिटी स्थित अपने घर लौट गए हैं और वहाँ पुस्तकें उनका साथ दे रही हैं.
बैंसला कहते हैं, "मुझे साहित्य, आत्मकथा, जीवनगाथा और इतिहास की पुस्तकें पसंद हैं. लेकिन शेक्सपियर का जवाब नहीं है. मैं उनके साहित्य का बड़ा प्रशंसक हूँ."
बैंसला बताते हैं कि उनके पूरे परिवार में पठन-पाठन की प्रवृत्ति है. उनके दो बेटे सेना में ऊँचे पदों पर हैं तो एक बेटा निजी कंपनी में उच्चाधिकारी है और बेटी भारतीय राजस्व सेवा की अधिकारी हैं.
तीन दिन पहले ही बैंसला जयपुर आए और आंदोलन के बाद उपजी समस्याओं पर सरकार से चर्चा की.
शासन और सत्ता के गलियारों से निकलने के बाद वह एमआई रोड स्थित पुस्तक भंडार जा पहुँचे और तीन पुस्तकें खरीद भी ली.
उनके नए दोस्तों में पीसी अलेक्जेंडर की 'दो कॉरिडोर्स ऑफॉ पावर', पी चिदंबरम की 'ए व्यू फ़्रॉम दि आउटसाइड' और क्रेमर की 'इन्हेलिंग दि महात्मा' हैं.
राजनीति से रिश्ता
बैंसला पूर्व में भाजपा के भूतपूर्व सैनिक प्रकोष्ठ से जुड़े रहे हैं, लेकिन सचमुच में राजनेताओं से उनका पाला अब पड़ा लगता है.
शायद यही वजह है कि वो 'कॉरिडोर्स ऑफ़ पावर' के पन्ने पलट रहे हैं.
बैंसला का कमरा भी खूबसूरत आवरण की पुस्तकों से पटा पड़ा रहता है.
पिछले दिनों वो एमजे अकबर की 'ब्लड ब्रदर्स ए फ़ैमिली सागा', चेतन भगत की 'फ़ाइव प्वाइंट' और वेद मारवाह की 'अनसिविल वार' जैसी चर्चित पुस्तकों के पन्ने पलट चुके हैं.