सोमवार, 04 जून, 2007 को 13:01 GMT तक के समाचार
नारायण बारेठ
बीबीसी संवाददाता, जयपुर
राजस्थान में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के साथ गूजर नेताओं की बातचीत के बाद गूजर नेताओं ने आंदोलन वापस लेने की घोषणा की है.
मुख्यमंत्री और गूजर नेताओं के बीच बातचीत के बाद मुख्यमंत्री ने एक आयोग बनाने का गठन किया है जो गूजरों के आरक्षण की मांग के बारे में एक रिपोर्ट केंद्र सरकार को देगी.
इस समिति की अध्यक्षता हाईकोर्ट के सेवानिवृत न्यायाधीश करेंगे जो केंद्र सरकार के मानदंडों के आधार पर गूजर समुदाय को आरक्षण दिए जाने के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करेगी.
यह समिति तीन महीनों में अपनी रिपोर्ट देगी.
गूजर नेता किरोड़ी सिंह बैंसला ने मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के साथ बातचीत के बाद प्रेस कांफ्रेस में कहा कि वो आंदोलन वापस ले रहे हैं क्योंकि उनकी मांगो पर सकारात्मक प्रगति हुई है.
पिछले छह दिनों से राजस्थान में गूजर समुदाय ने अनुसूचित जनजाति में शामिल किए जाने की मांग लेकर आंदोलन कर रहे थे.
इससे पहले गूजर संगठनों के सोमवार को दिल्ली में भी बंद का आह्वान किया था जिससे जनजीवन प्रभावित हुआ है.
हालांकि दिल्ली और इसकी सीमाओं पर सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए हैं.
लेकिन आंदोलनकारियों ने दिल्ली की उत्तर प्रदेश और हरियाणा से लगनेवाली सीमा पर कई जगह जाम लगा दिया है जिससे यातायात बाधित हुआ है.
इधर कांग्रेस के दो गूजर सांसदों सचिन पायलट और अवतार सिंह भडाना के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल रविवार को भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह से मिला.
इन लोगों ने भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व से राजस्थान के मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की माँग की.
राजनाथ सिंह से मिलने के बाद अवतार सिंह भडाना ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, "राजनाथ सिंह ने इस बात का आश्वासन दिया है कि जो कुछ भी राजस्थान में हो रहा है, उसे वे गंभीरता से लेंगे."
लेकिन अवतार सिंह का ये भी कहना था कि अगर हालात नहीं सुधरे तो वे केंद्र सरकार से राज्य सरकार को बर्ख़ास्त करने की माँग करेंगे.
राजस्थान में गूजरों को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) में रखा गया है लेकिन वे अनुसूचित जनजाति के तहत मिलने वाली आरक्षण सुविधा की मांग कर रहे हैं.
दूसरी ओर राजस्थान का मीणा समुदाय इसका विरोध कर रहा है. इस पर दोनों समुदायों के बीच हिंसक झड़पें हुईं हैं.
हालांकि गूजर पंचायत की अनुमति के बाद 29 मई को हुई हिंसा में मारे गए छह लोगों का रविवार को अंतिम संस्कार कर दिया गया.
लेकिन जयपुर-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग अब भी अवरुद्ध है और आंदोलनकारी किसी भी वाहन को आने-जाने नहीं दे रहे हैं.
उनका कहना है कि जब तक इस इलाक़े में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया नहीं आती हैं, वे रास्ता जाम रखेंगे. सड़कों पर सैकड़ों वाहन फँसे पड़े हैं.
ग़ौरतलब है कि पिछले दिनों इस मांग ने हिंसक रूप ले लिया था और अभी तक हिंसा में 23 लोगों की मौत हो चुकी है.