रविवार, 03 जून, 2007 को 03:34 GMT तक के समाचार
राजस्थान में तेज़ी से बदलते घटनाक्रम में गूजर नेता किरोड़ी सिंह बैंसला मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से बात करने के लिए तैयार हो गए हैं.
उधर दिल्ली में गूजर समाज के हज़ारों लोगों ने जंतर मंतर पर प्रदर्शन किया और राजस्थान में गूजर समुदाय के लोगों को अपना समर्थन दिया.
कांग्रेस के दो गूजर सांसदों सचिन पायलट और अवतार सिंह भड़ाना के नेतृत्व में लगभग सभी पार्टियों के प्रतिनिधि भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष राजनाथ सिंह से मिले.
इन लोगों ने बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व से माँग रखी कि वो तुरंत राजस्थान के मामले में हस्तक्षेप करे.
राजनाथ सिंह से मुलाकात के बाद अवतार सिंह भड़ाना ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, "राजनाथ सिंह जी ने हमें आश्वासन दिया है कि जो कुछ वहाँ हो रहा है वे इसे गंभीरता से लेंगे. मैं ये पूछता हूँ कि कब लेंगे, कितना समय हो गया है. खाना लेकर जो गाड़ियाँ जा रही हैं उन्हें जलाया जा रहा है. अगर ये नहीं रूका तो हम भारत सरकार से माँग करेंगे कि यदि राज्य सरकार का़नून व्यवस्था नहीं बरकरार रख सकती तो उस सरकार को बर्ख़ास्त कर देना चाहिए."
वहीं बीजेपी प्रवक्ता रवि शंकर प्रसाद ने कहा, “इस प्रतिनिधिमंडल में कांग्रेस,बीजेपी, समाजवादी पार्टी, बीएसपी और एनसीपी के लोग थे यानी उस समाज के हर राजनीतिक वर्ग के लोग थे. इन सब ने राजस्थान की स्थिति पर चिंता प्रकट की. राजनाथ सिंह जी ने कहा है कि इस समय ज़रूरत इस बात की है शांति और सदभाव बनाने की कोशिश की जाए और इस मामले को राजनीतिक प्रतिस्पर्धा से अलग करके देखें.”
गूजर प्रतिनिधियों ने कांग्रेस नेतृत्व से भी मुलाकात की और केंद्र सरकार के हस्तक्षेप की माँग रखी. कुछ गूजर संगठनों ने दिल्ली में सोमवार को बंद का आह्वान किया है.
दिल्ली के आस-पास के इलाक़ों में गूजरों के प्रभाव के चलते आम जनजीवन प्रभावित हो सकता है.
मुलाकात के लिए तैयार
इससे पहले सुबह गूजर नेता किरोड़ी सिंह बैंसला ने वसुंधरा राजे से बात करने से इनकार कर दिया था. हालांकि बाद में वे मुलाकात के लिए तैयार हो गए.
गूजर नेताओं का आरोप था कि राज्य सरकार ने बैंसला की सुरक्षा के इंतज़ाम नहीं किए और दौसा में आंदोलनकारियों को अलग-थलग करने की कोशिश के तहत रसद से लदे ट्रकों को रोक लिया गया था.
गूजर नेताओं का कहना था कि इस स्थिति में सरकार से बात करना संभव नहीं है.
बाद में बैंसला ने कहा कि अब समाज की भलाई के लिए वे मुख्यमंत्री से बात करने को तैयार हो गए हैं. उन्होंने कहा कि दौसा में आंदोलनकारियों तक रसद पहुँच गए हैं.
आंदोलन के दौरान मारे गए छह लोगों के शवों का दाह संस्कार करने का फ़ैसले के बाद तीन लोगों का अंतिम संस्कार कर दिया गया. ये लोग 29 मई को दौसा में हुई पुलिस फ़ायरिंग में मारे गए थे.
अब तक की वार्ता
इससे पहले राज्य सरकार के साथ गूजर नेताओं की चार दौर की वार्ता बिना किसी नतीजे पर पहुँचे ख़त्म हो चुकी है.
वसुंधरा राजे सिंधिया के साथ गूजर नेताओं की सीधी बातचीत विफल रहने के बाद मुख्यमंत्री कहा था कि गूजर समाज के प्रमुख नेता किरोड़ी सिंह बैंसला की उपस्थिति के बिना वार्ता नहीं हो सकती.
इस बीच राज्य सरकार ने 11 ज़िलों में राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून लगा दिया गया है.
राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून के तहत ज़िलाधीशों को हिंसा पर नियंत्रण करने के लिए और अधिक अधिकार मिल जाएंगे.
पिछले कुछ दिनों से इन ज़िलों में गूजरों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिए जाने को लेकर हिंसक आंदोलन हो रहे हैं जिनमें 23 लोगों की जानें जा चुकी हैं.
इस बीच पाटोली में जमे मीडियाकर्मियों को वहाँ से खदेड़ दिया गया है. ये पत्रकार आस-पास की धर्मशालाओं और होटलों में रुके हुए थे.
होटल मालिकों ने उन्हें कमरा खाली करने के आदेश दे दिए जिसके बाद 22 गाड़ियों में सभी पत्रकार वहाँ से लौट गए हैं.
पत्रकारों का आरोप है कि ऐसा राज्य सरकार के आदेश पर किया गया.
इन्हीं पत्रकारों में शामिल श्रीपाल सक्तावत ने बताया कि लौटने के दौरान रास्ते में गूजर और मीणा दोनों समुदायों के लोगों ने मीडियाकर्मियों को पीटने की कोशिश की.
ग़ौरतलब है कि राजस्थान में गूजरों को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) में रखा गया है लेकिन वो अनुसूचित जनजाति के तहत मिलने वाली आरक्षण सुविधा की माँग कर रहे हैं.