शुक्रवार, 01 जून, 2007 को 21:40 GMT तक के समाचार
पाकिस्तानी सेना के कमांडरों ने चेतावनी दी है कि कुछ मुट्ठीभर लोग अपने ग़लत मकसदों के लिए सरकार के ख़िलाफ़ एक विद्वेषपूर्ण अभियान चला रहे हैं.
सेना की ओर से यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब पाकिस्तानी राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ की ओर से जारी सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को हटाने के फैसले को कड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है.
सेना के इस बयान और चेतावनी के बाद से विपक्ष के राष्ट्रपति के ख़िलाफ़ एकजुट होने के प्रयासों में और तेज़ी आई है.
उधर, ताज़ा घटनाक्रम में पाकिस्तान के दो मीडिया चैनलों के सीधे प्रसारणों पर रोक लगा दी गई है.
ये दोनों चैनल, उन टीवी माध्यमों में शामिल हैं जिन्होंने मुख्य न्यायाधीश इफ़्तिख़ार चौधरी के निलंबन से जुड़े कई पहलुओं को प्रमुखता के साथ प्रसारित किया था.
चेतावनी
सेना कमांडरों की ओर से यह चेतावनी रवालपिंडी में हुई सेना कमांडरों की एक बैठक के बाद दी गई.
बयान में कहा गया है कि सरकार के खिलाफ़ लोगों को भड़काने जैसे प्रयास केवल निजी स्वार्थों को पूरा करने के लिए किए जा रहे हैं और इनसे देश के विकास पर असर पड़ेगा.
सेना कमांडरों की इस बैठक के बारे में संवाददाताओं की राय है कि ऐसी बैठकों के बाद सेना की ओर से इस तरह की प्रेस विज्ञप्ति आना एक बिल्कुल अप्रत्याशित बात है.
इस बयान के बाद राष्ट्रपति की ओऱ से सेना कमांडरों को आश्वासन दिया गया कि देश में अस्थिरता लाने की छूट किसी को भी नहीं दी जाएगी.
विपक्ष के साथ ही देशभर में वकीलों ने भी वर्तमान सरकार के खिलाफ़ संघर्ष का आहवान कर दिया है. वकीलों के संघर्ष की शुरुआत मुख्य न्यायाधीश चौधरी को इस वर्ष नो मार्च को गिरफ़्तार करने के बाद शुरू हुआ.