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शुक्रवार, 01 जून, 2007 को 02:48 GMT तक के समाचार

नारायण बारेठ,
बीबीसी संवाददाता, राजस्थान

राजस्थान में तनाव जारी, सरकार में मतभेद

राजस्थान में मीणा समुदाय ने गूजरों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की माँग का कड़ा विरोध किया है.

अब इस बात की चिंता जताई जा रही है कि यह मामला अनुसूचित जनजाति में शामिल मीणा समुदाय और गूजरों के बीच सामुदायिक संघर्ष का रुप ले सकता है.

राज्य में तनाव जारी है. गूजर नेताओं और राज्य सरकार के बीच आज फिर बातचीत होगी. गुरुवार को दूसरे दौर की बातचीत बेनतीज़ा ख़त्म हो गई थी.

इस बीच शुक्रवार को सवाई माधोपुर में हुई हिंसा में चार लोगों के मारे जाने के साथ ही मरने वालों की संख्या बढ़ कर 18 हो गई है.

इससे पहले दौसा में मंगलवार को गूजर समुदाय और पुलिस के बीच संघर्ष के बाद फायरिंग में 14 लोगों की मौत हो गई थी.

सरकार में मतभेद

लेकिन वसुंधरा राजे सरकार भी इस मामले पर एकमत नज़र नहीं आ रही है. गूजर समुदाय और मीणा समुदाय के मंत्री अलग-अलग भाषा बोल रहे हैं.

राज्य के खाद्य मंत्री किरोड़ीलाल मीणा ने कहा है कि मीणा समुदाय किसी भी सूरत में अनुसूचित जनजाति के दायरे में विस्तार स्वीकार नहीं करेगा.

उनका कहना है," इस मामले पर मीणा समुदाय के सभी विधायक एकमत हैं. हम मीणाओं को प्राप्त आरक्षण के साथ किसी तरह की छेड़खानी बर्दाश्त नहीं करेंगे."

तो दूसरी ओर सरकार में गूजर समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाले कालूलाल गूजर का कहना है कि राज्य सरकार को इस माँग पर विचार करना चाहिए.

अब तक अन्य पिछड़ा वर्ग में शामिल गूजरों का कहना है कि उन्हें इस वर्ग में रहकर आरक्षण का लाभ नहीं मिल रहा है और अब उन्हें अनुसूचित जनजाति में शामिल किया जाना चाहिए.

तनाव

मीणा समुदाय के प्रतिनिधियों की दौसा में लगातार बैठकें हो रही हैं और वो लामबंद हो रहे हैं. उन्होंने कहा है कि अगर राष्ट्रीय राजमार्गों पर यातायात बहाल नहीं हुआ तो वे ख़ुद कार्रवाई करेंगे.

राजस्थान के गृह मंत्री गुलाबचंद कटारिया ने स्वीकार किया है कि उन्होंने पिछले 50 वर्षों में राज्य में ऐसी हिंसा नहीं देखी.

राज्य सरकार ने भरतपुर के हिंसाग्रस्त बयाना और सवाई माधोपुर में सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने की कोशिश करने वालों को देखते ही गोली मारने के आदेश दिए हैं.

गूजर नेता विक्रम सिंह का कहना है कि राज्य सरकार की नीति स्पष्ट नहीं है और वो इस मामले को तूल दे रही है.

उन्होंने कहा, "अगर राज्य सरकार की नीति स्पष्ट है तो वो गूजरों को एसटी का दर्जा देने के लिए केंद्र सरकार को चिट्ठी लिखे. सरकार जानबूझ कर देरी कर रही है ताकि गूजर-मीणा लड़ें."