शुक्रवार, 01 जून, 2007 को 11:51 GMT तक के समाचार
दिल्ली हाई कोर्ट ने इंडियन एयरलाइंस की उन एयर होस्टेस की याचिका ख़ारिज कर दी है जिन्हें ओवरवेट यानी वजन अधिक होने की वजह से ग्राउंड ड्यूटी पर भेज दिया गया था.
हाईकोर्ट ने अपने फ़ैसले में कहा कि सरकारी एयरलाइन को भी बढ़ती प्रतिस्पर्धा से निपटने और यात्रियों की सुरक्षा के लिए हर क़दम उठाने का अधिकार है.
इंडियन एयरलाइंस ने एयर होस्टेस के लिए पिछले वर्ष ही लंबाई के अनुपात में वजन का एक मानक तैयार किया था. कुछ एयर होस्टेस ने इसे चुनौती दी थी.
दिल्ली हाईकोर्ट ने एयरलाइन के पक्ष में फ़ैसला देते हुए कहा कि विमान काफ़ी ऊंचाई पर उड़ान भरते हैं और एसी स्थिति में यात्रियों की सुरक्षा अंदर मौजूद कर्मचारियों की कार्यक्षमता पर निर्भर करती है.
न्यायमूर्ति रेखा शर्मा ने कहा, ''कोई भी एयरलाइन किसी भी क्षेत्र में ढिलाई नहीं बरत सकती चाहे फिर वह कर्मचारियों का व्यक्तित्व ही क्यों न हो.''
उन्होंने अपने फ़ैसले में कहा कि इस तरह के कार्यों की जरूरतों को देखते हुए एयर होस्टेस को अपना शारीरिक फिटनेस मानक के अनुसार बनाए रखना चाहिए.
जस्टिस रेखा शर्मा ने एयर होस्टेस की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि एयरलाइन की नीति से उनके स्त्रीत्व का अपमान हुआ है.
उन्होंने कहा,'' मेरी समझ में यह नहीं आ रहा है कि वजन को नियंत्रित करने के लिए कहना कैसे पक्षपातपूर्ण, अव्यावहारिक और स्त्रीत्व का अपमान है.''
ग़ौरतलब है कि इंडियन एयरलाइंस ने उड़ान के दौरान विमान में मौजूद रहने वाले कर्मचारियों के लिए पिछले वर्ष वजन संबंधी एक दिशा-निर्देश तैयार किया था.
एयरलाइन का तर्क था कि उसने यह क़दम यात्रियों की सुरक्षा और बढ़ती प्रतिस्पर्धा को ध्यान में रखते हुए उठाया है.
दूसरी तरफ इसे चुनौती देने वाली कुछ एयर होस्टेस का कहना था कि यह क़दम उन्हें हटाकर युवा लड़कियों को रखने के लिए उठाया गया है.
इनमें से एक को 25 साल एयर होस्टेस रहने के बावजूद मानक से दो किलो अधिक वजन होने पर ही ग्राउंड ड्यूटी पर भेज दिया गया था.