बुधवार, 30 मई, 2007 को 02:18 GMT तक के समाचार
पाकिस्तान के निलंबित मुख्य न्यायाधीश इफ़्तिख़ार मोहम्मद चौधरी ने आरोप लगाया है कि इस्तीफ़ा देने से इनकार करने के बाद उन्हें ग़ैर क़ानूनी तरीक़े से हिरासत में रखा गया.
सुप्रीम कोर्ट को सौंपे दस्तावेज़ में चौधरी ने कहा है कि पाकिस्तान के राष्ट्रपति जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ ने कदाचार के कथित आरोपों की आड़ में उन पर इस्तीफ़ा देने के लिए दबाव बनाया.
उनका कहना है कि जब उन्होंने इस्तीफ़ा देने से इनकार कर दिया तो उन्हें ख़ुफ़िया विभाग ने पाँच घंटे तक ग़ैर क़ानूनी तरीक़े से हिरासत में रखा.
जस्टिस चौधरी ने अदालत को दिए हलफ़नामे के ज़रिए पहली बार निलंबन के समय के घटनाक्रम का उल्लेख किया है.
निलंबित मुख्य न्यायाधीश के वक़ील ने अदालत में कहा कि राष्ट्रपति मुशर्रफ़ उनके मुवक्क़िल के ख़िलाफ़ 'निजी द्वेष' रखते हैं.
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि जनरल मुशर्रफ़ को लग रहा था कि इफ़्तिख़ार चौधरी दोबारा राष्ट्रपति बनने की उनकी योजना पर पानी फेर सकते हैं.
जस्टिस जौधरी के निलंबन के ख़िलाफ़ पूरे देश में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए हैं और इसे जनरल मुशर्रफ़ के लिए अब तक की सबसे बड़ी चुनौती माना जा रहा है.
'निर्दोष'
मई माह के शुरू में निलंबन के मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में कराने की चौधरी की अपील स्वीकार कर ली गई थी.
इससे पहले राष्ट्रपति ने उन्हें निलंबित करते हुए मामले को पाकिस्तान की सर्वोच्च न्यायिक परिषद के हवाले कर दिया था.
मंगलवार को इफ़्तिख़ार चौधरी के वकीलों ने अदालत में उनका पक्ष रखा और हलफ़नामा सौंपा जिसमें निलंबन के समय क्या हुआ, इसका ब्यौरा दिया गया है.
इस हलफ़नामे की प्रति बीबीसी ने देखी है जिसमें कहा गया है कि जब चौधरी को जनरल मुशर्रफ़ ने रावलपिंडी के आर्मी हाउस में तलब किया तब वहाँ इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई), सैन्य ख़ुफ़िया विभाग (एमआई) और ख़ुफ़िया ब्यूरो (आईबी) के प्रमुखों ने उन पर इस्तीफ़ा देने के लिए पाँच घंटे तक दबाव बनाया.
हलफ़नामे के मुताबिक इफ़्तिख़ार चौधरी ने दबाव में नहीं झुकते हुए स्पष्ट कहा, "मैं इस्तीफ़ा नहीं दूंगा क्योंकि मैं निर्दोष हूँ."