बुधवार, 30 मई, 2007 को 18:11 GMT तक के समाचार
अमरीकी विदेश उपमंत्री निकोलस बर्न्स और शिवशंकर मेनन के बीच असैनिक परमाणु समझौते पर कई मतभेदों को दूर कर लिया गया है.
संवाद समिति पीटीआई के अनुसार भारतीय विदेश सचिव शिवशंकर मेनन से मुलाकात के बाद बर्न्स ने कहा कि इस दिशा में ''अब कुछ क़दमभर चलना '' ही बाकी है.
बर्न्स कल से मेनन के साथ औपचारिक वार्ताएं कर रहे हैं और आज उन्होंने मेनन से शिष्टाचार मुलाक़ात की.
हालांकि विदेश मंत्रालय ने पुष्टि कर दी है कि दोनों पक्षों के बीच परमाणु मुद्दे को लेकर बातचीत हुई है.
बर्न्स समझौते के कुछ प्रस्तावों पर मतभेद सुलझाने के लिए तीन दिन की यात्रा पर भारत आए हैं.
दोनो देश समझौते के 90 फ़ीसदी प्रस्तावों पर सहमत हैं और मतभेदों को सुलझाने के लिए लगातार चर्चा कर रहे हैं.
शिवशंकर मेनन के साथ बातचीत शुरु करने से पहले बर्न्स ने संवाददाताओं से कहा कि समझौते को लेकर लगभग दो साल पहले शुरू हुई बातचीत ने लंबा सफ़र तय किया है.
उन्होंने कहा कि दोनो देश मंजिल तक लगभग पहुँच गए हैं और अब समझौते को अमली जामा पहनाने के लिए बस क़दम-दो-क़दम का ही फ़ासला बचा है.
बर्न्स ने उम्मीद जताई कि समझौता जल्दी ही परवान चढ़ जाएगा.
मतभेद
दरअसल, दोनों पक्षों के बीच परमाणु ईंधन के दोबारा इस्तेमाल और भारत के परमाणु परीक्षण करने के अधिकारों को लेकर सहमति नहीं बन पा रही है.
मेनन और बर्न्स के बीच पिछले हफ़्ते ही बातचीत होनी थी, लेकिन कुछ तकनीकी मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाने के कारण इसे टाल दिया गया था.
अपनी भारत यात्रा से पहले बर्न्स कहा कि वो इस यात्रा को लेकर आशान्वित हैं.
उनका कहना था कि समझौते के लिए दोनों ही पक्षों को कुछ मुद्दों पर अपने रुख़ में बदलाव लाना होगा.
दोनों पक्षों के बीच इससे पहले लंदन में भी बातचीत हुई थी.
उल्लेखनीय है कि अगले महीने जर्मनी में जी-8 देशों की बैठक में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की मुलाक़ात अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश से होगी और तब शायद परमाणु समझौते की प्रगति पर चर्चा होगी.